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उनके मुख से प्रथम शब्द ॐ निकला जो सूर्य का तेज रुपी सूक्ष्म रूप था। तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट ह...
24/11/2024

उनके मुख से प्रथम शब्द ॐ निकला जो सूर्य का तेज रुपी सूक्ष्म रूप था। तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए जो ॐ के तेज में एकाकार हो गए। यह वैदिक तेज ही आदित्य है जो विश्व का अविनाशी कारण है। ये वेद स्वरूप सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति,पालन व संहार के कारण हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि और मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप का विवाह प्रजापति दक्ष की कन्या दिती और अदिति से हुआ था। अदिति इस बात से दुखी थी कि दैत्य और देवताओं में आपसी लड़ाई होती रहती थी। तब अदिति ने सूर्यदेव की उपासना की।

विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही धरती पर जीवन संभव है और इसलिए वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की उपासना का चलन रहा है। वेदों की ऋचाओ में अनेक स्थानों पर सूर्यदेव की स्तुती की गई है।

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हनुमान सामाजिक समन्वय और विकास के अग्रदूत हैं। वह योद्धा के रूप में पवन गति के स्वामी हैं बल्कि वह सुशासित राम राज्य के ...
23/11/2024

हनुमान सामाजिक समन्वय और विकास के अग्रदूत हैं। वह योद्धा के रूप में पवन गति के स्वामी हैं बल्कि वह सुशासित राम राज्य के पुरोधा और कुल पुरोहित भी हैं। मान्यता है कि पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था जिस कारण मंगलवार के दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। चिरंजीवी हनुमान को पवन पुत्र कहा गया है।
हनुमान जी आज भी उस जगह पर जरूर आते हैं, जहां पर राम कथा की जाती है। जहां भी प्रभु श्री राम की स्तुति की जाती है, वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में अपने भक्तों को दर्शन देने पहुंच जाते है। हनुमान जी की कृपा पाने के लिए प्रभु श्री राम का स्मरण जरूर करना चाहिए।

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जय श्री राम सनातन धर्म जय माता दी जय श्री महाकाल भक्ति शक्ति हर हर महादेव महाकाल जय बजरंगबली ॐ जय मां लक्ष्मी जी की जय हो Bhakti Sagar नारायण Lord Vishnu श्रीहरि भगवान विष्णु जय माँ वैष्णों देवी जय छठी मईया ्रीराम_जानकी_जय_हनुमान_जी ्री_राम_जानकी_जय_हनुमान_जी हर हर महादेव ूर्यदेव_महराज ंकर_महराज ्री_नारायण_हरि ां_काली

पौराणिक कथापौराणिक काल में रक्तबीज नाम का एक असुर हुआ करता था। वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। उसने भगवान शिव की घोर त...
22/11/2024

पौराणिक कथा

पौराणिक काल में रक्तबीज नाम का एक असुर हुआ करता था। वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। उसने भगवान शिव की घोर तपस्या करके वरदान पाया था। उसे वरदान मिला था कि उसके रक्त की जितनी बूंदें धरती पर गिरेंगी, उतने ही बलशाली असुर उत्पन्न हो जाएंगे। भगवान शिव से वरदान मिलने के बाद वह ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगा। फिर ऋषि-मुनियों ने देवताओं से रक्षा करने की विनती की।

रक्तबीज और देवताओं का युद्ध

ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए देवताओं ने रक्तबीज को युद्ध के लिए ललकारा। रक्तबीज भी युद्ध करने आ पहुंचा। युद्ध में रक्तबीज के शरीर से खून की गिरने वाली सभी बूंदें रक्तबीज के जैसे ही बलशाली असुर बन जाते। काफी समय तक युद्ध करने के बाद भी देवतागण उसे युद्ध में मार नहीं पाए। अंत में देवताओं को रक्तबीज ने हरा दिया और देवलोक को अपने अधिकार में कर लिया। इसके बाद सभी देवता शिवजी के पास पहुंचे। सभी ने भगवान शिव से रक्षा करने की प्रार्थना की।

माता काली की उत्पत्ति

उस समय देवी पार्वती भी शिव जी के साथ ही मौजूद थी। देवताओं की बातें सुनकर वह क्रोध से लाल हो गईं। तब उनके शरीर से माता काली की उत्पत्ति हुई। फिर देवी काली रक्तबीज से युद्ध करने निकल पड़ीं। युद्ध के मैदान में देवी काली ने अपने जीभ को काफी बड़ा कर लिया। उसके बाद रक्तबीज के शरीर से जो भी रक्त की बूंदें गिरती, माता काली उस से उत्पन्न होने वाले असुरों को निगल जाती। इस तरह जब रक्तबीज का शरीर रक्त विहीन हो गया तो माता काली ने उसका भी अंत कर दिया।

महाकाली बनीं मां काली

रक्तबीज के वध के बाद भी मां काली का क्रोध शांत नहीं हो रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह तीनों लोकों को निगल जाएंगी। देवी के रूप को देखकर सारे देवता इधर-उधर भागने लगे। तब भगवान शिव उनके रास्ते में लेट गए। क्रोध में ही देवी काली ने भगवान शिव की छाती पर अपना पैर रख दिया। इसके बाद देवी काली का क्रोध शांत हुआ।

कालिका पुराण की कथा

वहीं कालिका पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार हिमालय पर स्थित मतंग मुनि के आश्रम सभी देवता पहुंचे। उसके बाद मतंग मुनि ने यज्ञ आरंभ किया। फिर सभी देवता महामाया देवी की स्तुती करने लगे। काफी समय तक स्तुति करने के बाद, माता महामाया देवताओं के सामने प्रकट हुई। माता ने देवताओं से पूछा कि तुम सभी किसकी स्तुति कर रहे हो ? उसी समय देवी महामाया के शरीर से एक काली रंग की दिव्य स्त्री प्रकट हुईं। उस दिव्य स्त्री ने देवी महामाया से कहा ये सभी मेरी ही स्तुति कर रहे हैं। वही देवी महाकाली के नाम से जानी जाती है।

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विष्णु भगवान की कहानी - जब विष्णु ने शिव को मुश्किल से बाहर निकाला।यौगिक कथाओं में ऐसी कई कहानियाँ हैं, जिनमें बताया गया...
21/11/2024

विष्णु भगवान की कहानी - जब विष्णु ने शिव को मुश्किल से बाहर निकाला।

यौगिक कथाओं में ऐसी कई कहानियाँ हैं, जिनमें बताया गया कि शिव की करुणा कोई भेदभाव नहीं करती और वे किसी की इच्छा पर बच्चों की तरह भोलापन दिखाते हैं। एक बार गजेंद्र नामक एक असुर था। गजेंद्र ने बहुत तप किया और शिव से यह वरदान पाया कि वह जब भी उन्हें पुकारेगा, शिव को आना होगा। त्रिलोकों के सदा शरारती ऋषि नारद ने देखा कि गजेंद्र हर छोटी-छोटी बात के लिए शिव को पुकार लेता था, तो उन्होंने गजेंद्र के साथ एक चाल चली।

उन्होंने गजेंद्र से कहा, ‘तुम शिव को बार-बार क्यों बुलाते हो? वह तुम्हारी हर पुकार पर आ जाते हैं। क्यों नहीं तुम उनसे कहते कि वह तुम्हारे अंदर आ जाएँ और वहीं रहें जिससे वह हमेशा तुम्हारे अंदर होंगे?’ गजेंद्र को यह बात अच्छी लगी और फिर उसने शिव की पूजा की। जब शिव उसके सामने प्रकट हुए, तो वह बोला, ‘आपको मेरे अंदर रहना होगा। आप कहीं मत जाइए।’ शिव अपने भोलेपन में एक लिंग के रूप में गजेंद्र में प्रवेश कर गए और वहाँ रहने लगे।

फिर जैसे-जैसे समय बीता, पूरा ब्रह्मांड शिव की कमी महसूस कर रहा था। कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ हैं। सभी देव और गण शिव को खोजने लगे। काफी खोजने के बाद, जब कोई यह पता नहीं लगा पाया कि वह कहाँ हैं, तो वे हल ढूंढने के लिए विष्णु के पास गए। विष्णु ने स्थिति देखी और कहा, ‘वह गजेंद्र के अंदर हैं।’ फिर देवों ने उनसे पूछा कि वे शिव को गजेंद्र के अंदर से कैसे निकाल सकते हैं क्योंकि गजेंद्र शिव को अपने अंदर रखकर अमर हो गया था।

हमेशा की तरह विष्णु सही चाल लेकर आए। देवगण शिवभक्तों का रूप धरकर गजेंद्र के राज्य में आए और बहुत भक्ति के साथ शिव का स्तुतिगान करने लगे। शिव का महान भक्त होने के कारण गजेंद्र ने इन लोगों को अपने दरबार में आकर गाने और नाचने का न्यौता दिया। शिवभक्तों के वेश में देवों का यह दल आया और बहुत भावनाओं के साथ, बहुत भक्तिपूर्वक वे शिव के लिए भक्तिगीत गाने और नाचने लगे। शिव, जो गजेंद्र के अंदर बैठे हुए थे, अब खुद को रोक नहीं सकते थे, उन्हें जवाब देना ही था। तो वह गजेंद्र के टुकड़े-टुकड़े करके उससे बाहर आ गए।

्री_नारायण_हरि जय श्री राम सनातन धर्म जय माता दी भक्ति शक्ति हर हर महादेव जय श्री महाकाल ॐ जय मां लक्ष्मी जी की जय हो महाकाल Bhakti Sagar नारायण Lord Vishnu श्रीहरि भगवान विष्णु हर हर महादेव ्रीराम_जानकी_जय_हनुमान_जी ूर्यदेव_महराज ्री_राम_जानकी_जय_हनुमान_जी ंकर_महराज ादेव जय माँ वैष्णों देवी

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