24/11/2024
उनके मुख से प्रथम शब्द ॐ निकला जो सूर्य का तेज रुपी सूक्ष्म रूप था। तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए जो ॐ के तेज में एकाकार हो गए। यह वैदिक तेज ही आदित्य है जो विश्व का अविनाशी कारण है। ये वेद स्वरूप सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति,पालन व संहार के कारण हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि और मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप का विवाह प्रजापति दक्ष की कन्या दिती और अदिति से हुआ था। अदिति इस बात से दुखी थी कि दैत्य और देवताओं में आपसी लड़ाई होती रहती थी। तब अदिति ने सूर्यदेव की उपासना की।
विज्ञान भी मानता है कि सूर्य के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही धरती पर जीवन संभव है और इसलिए वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की उपासना का चलन रहा है। वेदों की ऋचाओ में अनेक स्थानों पर सूर्यदेव की स्तुती की गई है।
ूर्यदेव_महराज
जय श्री राम जय माता दी जय श्री महाकाल सनातन धर्म भक्ति शक्ति हर हर महादेव महाकाल जय छठी मईया ॐ जय मां लक्ष्मी जी की जय हो हर हर महादेव नारायण Lord Vishnu श्रीहरि भगवान विष्णु ्रीराम_जानकी_जय_हनुमान_जी ूर्यदेव_महराज ्री_राम_जानकी_जय_हनुमान_जी ंकर_महराज ्री_नारायण_हरि ां_काली