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जितेश पांडे सर की कलम से🙏🏻 व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की पढ़ाई लिखाई वाले दोस्तों के लिए आज कुछ तथ्यात्मक चीज निकाल के लाया ह...
19/07/2022

जितेश पांडे सर की कलम से🙏🏻
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की पढ़ाई लिखाई वाले दोस्तों के लिए आज कुछ तथ्यात्मक चीज निकाल के लाया हूं. वैसे भी अपने देश में व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है और इससे हर साल बड़ी मात्रा में लोग ग्रेजुएट हो रहे हैं. तथाकथित यूनिवर्सिटी लोगों को अपने एसी वाले कमरे में बैठ कर मोबाइल चलाते हुए नए नए प्रकार के ज्ञान को पाने में सहूलियत प्रदान कर रही है.

तो आइए शुरू करते हैं आज की पाठशाला. उससे पहले कुछ टर्म आपके लिए जान लेना आवश्यक है क्योंकि मेरी पाठशाला ज्ञान पूरा देती है, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की तरह शॉर्टकट नहीं.

⬛ कंसोर्टियम फाइनेंस : जब कई बैंकों का समूह मिल कर किसी कंपनी को लोन देता है.

⬛ एनसीएलटी : नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, जहां पर बैंक उन कंपनियों पर केस दायर करतें हैं जो उनका पैसा लौटाने से चूक जाती हैं.

⬛ हेयरकट : किसी कंपनी को दिए गए लोन और जजमेंट आने के बाद कंपनी से बैंक को मिलने वाले पैसे के बीच का अंतर.

⬛राइट ऑफ : हेयरकट में जो नुकसान उठाना पड़ा उसे अपनी बैलेंस शीट से हटा देना (साफ कर देना) राइट ऑफ कहलाता है.

तो आइए शुरू करते हैं....

सिवा इंडस्ट्रीज़ एंड होल्डिंग्स नाम की एक कंपनी थी. इस कंपनी को आईडीबीआई बैंक की अगुवाई में बनाए गए कंसोर्टियम ने 4864 करोड़ रुपए फाइनेंस किए थे.

फिर कंपनी हो गई दिवालिया. केस लगा एनसीएलटी में. एनसीएलटी ने आदेश दिया की भईया तुम्हारी वित्तीय हालत ख़राब है तो तुम एक काम करो, 318 करोड़ रुपया दो, और काम खत्म करो. तो इस तरह से बैंकों ने अपने दिए हुए पैसों पर 94% हेयरकट यानी के 4546 करोड़ रुपए का नुकसान झेला.

अब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पास लोगों को लगता है की बैंक का पैसा सरकारी पैसा होता है. कोई फ्रॉड करके भाग जाए, या कंपनी दिवालिया हो जाए, तो जो पैसा डूबता है वो सरकारी पैसा है. तो चमन चूतियो आज तुम्हें एक नया ज्ञान बताता हूं.

मान लो तुमने बैंक में अपने बचत खाते में 50,000 रुपए जमा किए. तुम्हारी तरह सैकड़ों लोगों ने बैंक में अपने बचत खाते में पैसे जमा किए. अब तुमको चाहिए अपनी जमापूंजी पर ब्याज. तो भईया ब्याज कैसे देगा बैंक? बैंक की क्या कमाई है? बैंक की कमाई होती है आपके पैसे को दूसरे को उधार यानी की लोन देकर उससे मिलने वाले ब्याज से.

हां तो मान लो तुम्हारा खाता बैंक ऑफ इंडिया में है. बैंक ऑफ इंडिया ने सिवा इंडस्ट्रीज़ को दिए थे 74 करोड़ रुपए. एनसीएलटी के जजमेंट के बाद बैंक को सिवा इंडस्ट्रीज वापस करेगी मात्र 1 करोड़ रुपया. बाकी का बचा 73 करोड़ रुपए हो गया स्वाहा... पर तुम लोगों को तो अपने बचत खाते, एफडी खातों पर ब्याज चाहिए भईया टाइम से, तो बैंक क्या करेगी, धीमे धीमे ब्याज की दरें कम करती चली जायेगी. तो 2009 में जो ब्याज 11-12% पर था, वो अब रह गया है मात्र 5% एफडी पर और बचत खाते में जो 4% ब्याज मिलता था, वो रह गया है 2.5% पर.

पर तुम चमन चूतियो को लगता है की ये सरकारी पैसा है और डूब रहा है तो डूब जाए तुम्हारी बला से.

यह मात्र एक केस की बानगी है. दूसरी फोटो देखेंगे तो पाएंगे कि कितना पैसा बैंकों ने बांटा, कितना वापस मिला, और कितना बैंकों ने नुकसान उठाया. ये सब तुम्हारा ही पैसा था गुरू 😎

फिर आपकी माननीय सरकार आती है नेशनल टीवी पर, प्रिंट मीडिया पर और कहती है 'सरकारी बैंक घाटे में चल रहे हैं, हम इसमें और पूंजी नहीं लगा सकते'. तो तुम लोग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर ज्ञान पेलते हो की देखो 'बैंक सारा पैसा डूबा दे रही है, अब मोई जी बैंकों को कब तक पालें'

अब तुम लोगों को कौन समझाए के बेटा तुम्हारी ही जेब कट गई, और एक नहीं दोनों 😂

आज का ज्ञान समाप्त हुआ. जय हिंद 🙏

हां जी तो आज की ताजा खबर है ये के अब से थोड़ी ही देर में पूनम गुप्ता और अरविंद पनागरिया इंडियन पॉलिसी फोरम में एक पॉलिसी...
12/07/2022

हां जी तो आज की ताजा खबर है ये के अब से थोड़ी ही देर में पूनम गुप्ता और अरविंद पनागरिया इंडियन पॉलिसी फोरम में एक पॉलिसी पेपर सबमिट करेंगे जिसका शीर्षक है 'एसबीआई को छोड़ कर बाकी सभी पब्लिक सेक्टर बैंक को प्राइवेट किया जाए'.

दरअसल ये ऐसे ग्रुप को रिप्रेजेंट करते हैं जो मुख्यताः प्राइवेट सेक्टर के लोगों से ही भरा हुआ है.

इन महानुभावों के हिसाब से देश की अधिकतर जनता अब बैंकिंग प्राइवेट सेक्टर बैंक्स के माध्यम से करती है. दरअसल उन्होंने एक थप्पड़ रसीद के देश की जनता को मारा है. ये वही जनता है जो आज भी जीवनयापन करने के लिए सरकारी सहायता राशि, सब्सिडी, पेंशन पर निर्भर है. ये वही जनता है जिसे सरकारी बैंकों में जीरो बैलेंस खाते खुलवा कर बैंकिंग मुख्यधारा से जोड़ तो दिया गया परंतु आज भी वह खाते सरकारी बैंकों के लिए नुकसान का कारण बने हुए हैं.

ये वही जनता है जो दो वक्त की रोटी का जुगाड करने के लिए दिन रात मेहनत कर रही है पर फिर भी गृहस्थी की गाड़ी बार बार पटरी से उतर जाती है.

तो देश की जनता तुम ध्यान से सुनो, सरकार के हिसाब से तुम लोग मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास, या लोअर क्लास में नहीं आते हो. सरकार के हिसाब से तुम लोग अब संपन्न कैटेगरी में आते हो. यकीन नहीं होता? अरे देखो तो सही, तुम्हारा एक खाता प्राइवेट बैंक में भी है जहां तुमने 5000/10000/25000 से खाता खुलवाया था और जहां तुम आज भी अंगूठा लगा के 100/200/500 रुपए निकाल लेते हो.

और वो सब छोड़िए, इन महानुभावों ने तो ये भी कहा है को जब आने वाले समय में निजीकरण के लिए माहौल थोड़ा अनुकूल हो जाएगा तब एसबीआई को भी प्राइवेट कर दिया जाए. साथ ही साथ देश के सर्वोच्च बैंक आरबीआई की भूमिका और औचित्य पर सवाल उठाए गए हैं.

यह लोग जो पॉलिसी पेपर सबमिट करने वाले हैं, इनसे बस इतना ही कहना है, सुबह 10 बजे किसी गांव देहात की सरकारी बैंक की शाखा में पहुंच जाना, पूरा दिन वहां बिताना, और फिर उसी पॉलिसी पेपर की बत्ती बना कर अपने.............

सद्बुद्धि दो भगवान इनको, सद्बुद्धि 🙏

kumar pandey सर की कलम से 🙏🏻

17/12/2021

लाल लाल लेहराएगा
इंकलाब आएगा 🔥🔥🔥

16/12/2021
घर पर ना बैठे रहेहल्ला बोल ✊✊
16/12/2021

घर पर ना बैठे रहे
हल्ला बोल ✊✊

जितेश पंड्या सर कि से ✍🏼पूरे भारतवर्ष में 8 लाख बैंक कर्मचारी 2 दिन की हड़ताल करेंगें और अपनी तन्ख्वाह कटवाएँगे जो होती ह...
15/12/2021

जितेश पंड्या सर कि से ✍🏼
पूरे भारतवर्ष में 8 लाख बैंक कर्मचारी 2 दिन की हड़ताल करेंगें और अपनी तन्ख्वाह कटवाएँगे जो होती है लगभग 300 करोड़ रुपये.

Fun Fact : ये 300 करोड़ जो है ये बैंक अपने प्रॉफिट एंड लॉस में से देती है. यानी कि बैंक कर्मचारियों की तनख्वाह टैक्सपेयर के पैसे से नहीं बल्कि उसके ख़ुद की मेहनत से आती है.

मुद्दे की बात : ये हड़ताल है उन के लिए जो आज भी सरकारी बैंकों के भरोसे हैं, जिन्हें आज भी जीवन बसर करने के लिए वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सरकारी सब्सिडी का आसरा है. जो आज भी 100 रुपये निकालने आते हैं और अँगूठा लगा कर ठसक के साथ कहते हैं कि ज़ीरो बैलेंस पर खाता खुलवाया था.

और तुम व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़े लोगों को लगता है कि हड़ताल में बैंक कर्मचारियों की बल्ले बल्ले होती है 🤣

Conclusion : तो ये व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान लो और....
आगे खुद ही समझदार हो 😎

15/12/2021

किसी के सपनो को बेचना बड़ा आसान है और उससे भी आसान है अपने स्वार्थ को देश हित का नाम देना....
हम बैंक नहीं बिकने देंगे..
हम जनता का पैसा नहीं लूटने देंगे..

बैंक निजीकरण के पक्षधरो के लिये अंकुर कि ✍🏼 से ये एक गांव है जैसलमेर में,  पाकिस्तान बॉर्डर के पास, जैसलमेर से 100 km दू...
09/12/2021

बैंक निजीकरण के पक्षधरो के लिये अंकुर कि ✍🏼 से

ये एक गांव है जैसलमेर में, पाकिस्तान बॉर्डर के पास, जैसलमेर से 100 km दूर, जैसलमेर से बस एक बस जाती है और वो फिर वापस आती है, 100 km के रास्ते मे एक पानी की दुकान तक नही है, गांव में अगर आप बीमार हो गए तो शायद ही आप जैसलमेर city तक पहुंच पाओ, उससे पहले ही आप टाटा bye bye बोल के शायद ऊपर ना निकल जाओ, रास्ते मे गाड़ी खराब हो जाये, या किसी तरह की अनहोनी हो जाये आपके पास पैदल चलने के अलावा कोई और ऑप्शन नही होगा, ऐसे दुर्गम जगह पर सरकारी बैंक सेवा देते है, इस गाँव मे एक सरकारी ग्रामीण बैंक है, शायद एक स्कूल, एक एक छोटा सा स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्र, क्या आपको लगता है कि कभी कोई pvt स्कूल, pvt bank, pvt hospital यहां कभी खोल सकता है, अगर आपके पास इसका जवाब हां, है तो आपके सोचने, समझने और देश को जड़ से जानने की सोच समझ सब खो चुके है, आप किसी बढ़िया सिटी में पॉपकॉर्न, पिज़्ज़ा खाते हुए, कमेंट करके psu के प्राइवेट करने के फायदे बता सकते है,आप शायद किसी प्राइवेट संस्था में 10-20k की तनख्वाह में काम करके खुश हो सकते है, पर आप शायद ये तक नही जानते कि ये मिनिमम वेज भी आपको नही देते है, ये केवल आपको जीने भर का वेतन देते है, जिसमे केवल आप सांस ले सकते है इससे ज्यादा कुछ नही, न जॉब सिक्योरिटी है आपके पास न इस तरह की नौकरी जाने के बाद कोई दूसरा बैकअप प्लान, आप केवल और केवल भीड़ का हिस्सा बना के छोड़ दिये जाते है, भले ही आप कितने ही बुद्धिमान हो। मेरे कई मित्र जो बहुत ही प्रतिभाशाली है, नौकरियों के न होने के कारण अलग अलग प्राइवेट संस्थाओ में काम करते है, और इतने लाचार है कि वो छोड़ भी नही पा रहे, और दिन रात महनत में लगे होते है कि कैसे ही एक अच्छी सिक्योर जॉब हासिल कर लें, पर नही हम लोगो को केवल और केवल ये समझ आने लगा है कि सरकार ने जो फैसला लोए है वो देश हित में ही होगा, तो बहनो और भाइयो, ये बात आप कब समझेंगे की हर फैसला आपके हित के लिए नही सोचा जाता है, उनके निजी हित हो सके उसके लिए ये सब किया जाता है, अपने हको के लिए लड़े और राजनीति को समझे कि कैसे आपसे आपका सब कुछ छीना जा रहा है, और जिनका जवाब ना है, वो ध्यान रखे आपसे आपकी सम्पति जिस पर आपका देश का नागरिक होने के कारण अधिकार है, वो बेची जा रही है। बाकी आप समझदार है, बुद्धि का इस्तेमाल कीजिये,
और अंत मे, हम वाकई दो भारत से आते है, एक जिसमे हम रहते, और एक वो जो हम सब की सोच से परे का भारत है, 🙂

जब एक बच्चा मेहनत कर के कोई exam निकलता है तो उसके पीछे कितना संघर्ष छुपा होता है आप इस फोटो से समझ सकते हैअभिषेक बरनवाल...
07/12/2021

जब एक बच्चा मेहनत कर के कोई exam निकलता है तो उसके पीछे कितना संघर्ष छुपा होता है आप इस फोटो से समझ सकते है

अभिषेक बरनवाल की ✍🏼 से
👇🏼

मै अभिषेक बरनवाल वर्तमान मे केनरा बैंक मे कार्यरत हूँ!
मेरी पहली तस्वीर की कहानी उन दिनो की है जब मै बारहवीं की परीक्षा पास करके स्नातक मे दाखिला करवाने की सोच रहा था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पापा बोल दिये थे कि आगे की पढाई नही करवा सकते अगर पढ़ना है तो खुद से काम करके पढ़ो , घर के बड़े होने के नाते घर की सारी जिम्मेदारी मेरे हाथों है मुझे अपने साथ साथ घर की स्थिति को भी सुधारना था और ये स्थिति तब ही सुधार सकती थी जब मैं कोई नौकरी करूँ!
यही सोच रहा था की अब क्या करूँ जिससे पढ़ाई भी कर सकूँ और घर मे भी मदत कर सकूँ..
पर वो कहते है ना जहाँ चाह होती है वहाँ रास्ते मिल ही जाते है
भाई को छह हजार रुपए सालाना scholarship मिला था और वही छह हजार से मैने समान का फेरी(hawker) करना चालु किया था! सुबह से शाम तक फेरी करता था और रात मे घर आकर competition की तैयारी करता था

अपने स्वार्थ के लिये किसी के सपने बेचना बहोत आसान है जो आज सरकार कर रही है..

अंकुर की कलम से ✍🏼ये फ़ोटो उन दिनों की है जब हम बेरोजगार हुआ करते थे, सीट बुक करने की बात दूर, किराये के पैसे भी बड़ा सोच ...
02/12/2021

अंकुर की कलम से ✍🏼

ये फ़ोटो उन दिनों की है जब हम बेरोजगार हुआ करते थे, सीट बुक करने की बात दूर, किराये के पैसे भी बड़ा सोच समझ कर उठाते थे,
ये फोटो अनजाने में किसी दोस्त ने खींची थी, और मुझे नौकरी लगने के बाद शेयर की थी, ये शायद देख के आप में से काफी लोगो को हँसी आ जाये, पर कुछ को आपने दिन जरूर याद आएंगे।
ये फोटो हम में से 90% को याद दिलाते है कि हम कहाँ से आये है,
कैसे हमने ट्रैन के डब्बो में नीचे बैठ के, टॉयलेट के बगल में बैठ के परीक्षाओं के लिये सफर किया है,
कैसे बसों की छतों पे, साईकल से, पैदल, न जाने कितने km युही तय कर दिए है।

निजीकरण का विरोध हम इसलिये नहीं कर रहे की हम मोदी जी के विरोधी है
निजीकरण का विरोध हम इसलिये कर रहे क्यों की हम अपनी मेहनत अपने सपने किसी को ऐसे बेचने नहीं दें सकते🙂

 pandeyपोस्ट थोड़ी बड़ी है पर बात ज़रूरी है इसलिए आपको पढ़नी चाहिए. जिन्हें बड़ी पोस्ट पढ़ने से 'नींद' आती हो वो कृपया अपनी चि...
24/04/2021

pandey

पोस्ट थोड़ी बड़ी है पर बात ज़रूरी है इसलिए आपको पढ़नी चाहिए. जिन्हें बड़ी पोस्ट पढ़ने से 'नींद' आती हो वो कृपया अपनी चिरनिद्रा में ही लीन रहें 🙏

कल अपने फेसबुक वाल पर मैंने एक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें भारतीय वायुसेना द्वारा एयरलिफ्ट किये जा रहे ऑक्सीजन टैंकर्स, मेडिकल इक्विपमेंट का ज़िक्र था. बहुत सारे लोगों ने पोस्ट को ना सिर्फ लाइक किया बल्कि कहा कि ऐसे समय पर सेना ही आगे आ कर काम करती है.

जब 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस' चलाई गई तो मेरी फेसबुक वाल पर कई लोगों ने 'मोदी है तो मुमकिन है' लिख कर उक्त ख़बर को पोस्ट किया. वो क्या है कि आईटी सेल 'ब्रांडिंग' का काम बखूबी कर लेता है और फिर व्हाट्सएप, फेसबुक वगैरह पर उसको वायरल कर देता है. इतना वायरल की लोग उसके पीछे की हकीकत तक भूल जाते हैं.

ऑक्सीजन एक्सप्रेस से जुड़ी कुछ जानकारी आपके साथ साझा करना चाहता हूँ. भारतीय रेलवे ने केंद्र सरकार के अनुरोध पर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के विज़ाग स्थित प्लांट से 100 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन लाने के किये एक हाई प्रायोरिटी ट्रेन चलाने का निर्णय लिया जिसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. ट्रेन को ऑपरेट किया 'भारतीय रेलवे' ने, उस समय ना तो आईआरसीटीसी आगे आया और ना ही निजी क्षेत्र का कोई बड़ा खिलाड़ी जिसके पास 'लो फ्लोर डिब्बे' थे जिसके माध्यम से कंटेनर्स को उसमें लोड करके भेजा जा सकता था. तो वो 'लो फ्लोर डिब्बे' 'भारतीय सेना' ने दिए जिसके माध्यम से वो अपने आयुध/अपने टैंकों/अपनी मशीनों को एक जगह से दूसरी जगह भेजते हैं.

अब आते हैं विज़ाग स्थित स्टील प्लांट पर जहां से उक्त ट्रेन को 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ले कर आना था. आप में से शायद कइयों को ना पता हो पर इस प्लांट को सरकार निज़ी हाँथो में बेचना चाहती है. 18000 करोड़ रुपये के टर्नओवर और 740 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट के बावजूद सरकार इस प्लांट को निजी हाँथों में देना चाहती है. कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले इसी प्लांट के कर्मचारी दो महीने से आंदोलित थे सरकार के इस निर्णय के खिलाफ. प्रत्यक्ष तौर पर 40,000 लोगों को और अप्रत्यक्ष रूप से 400000 लोगों को रोजगार देता है ये स्टील प्लांट. इस प्लांट में 5 ऑक्सीजन एक्सट्रैक्शन यूनिट लगी हुई हैं जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2600 टन है.

खैर मुद्दे की बात ये है कि जब जब देशहित की बात आती है तो देश के जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर को सम्भालने वाले पब्लिक सेक्टर यूनिट्स सबसे पहले खड़े हो जाते हैं. भारतीय रेल, भारतीय पोस्ट ऑफिस, सरकारी अस्पताल, सरकारी स्टील प्लांट, सरकारी बैंक, भारतीय सेना ये सब आज उस समय भी काम कर रहे हैं जब देश की एक बड़ी आबादी घर से बाहर निकलने में असमर्थ है और महामारी का दंश झेल रही है.

जब आप किसी सरकारी अस्पताल का मज़ाक बनाते हैं, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर का मज़ाक बनाते हैं तो आप कभी ये नहीं सोचते कि सरकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या किया? जब बड़े बड़े निजी अस्पताल कोरोना के पेशेंट को एक अदद आईसीयू बेड के लिए 3 दिन में 100000 रुपये तक चार्ज कर लेते हैं, किसी नेता, एमएलए, पत्रकार की गुज़ारिश पर एडमिट करते हैं तब जा कर समझ आता है कि देश में मूलभूत सुविधाओं का नियंत्रण सरकारी हाँथों में होना क्यों ज़रूरी है.

नासिक में जब ऑक्सीजन टैंक लीक होने से 24 लोग मर जाते हैं तो किस पर कार्यवाही हुई? आज दिल्ली में एक अस्पताल में ऑक्सीजन समाप्त हो जाने से 9 मरीज मर गए, किस पर कार्यवाही हुई?

ये वही देश है जहाँ सरकार के अनुरोध करने पर भारतीय सेना के तीनों अंगों (एयरफोर्स, आर्मी, नेवी), डीआरडीओ (DRDO), आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB), डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (DPSU)और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अहमदाबाद में 900 बेड, लखनऊ में 400 बेड और वाराणसी में 750 बेड के अस्थाई कोविड अस्पताल का निर्माण मात्र 9 घंटे में कर दिया. सरकार के अनुरोध करने पर इन सभी ने अपने सभी रिटायर्ड सरकारी डॉक्टर्स/पैरामेडिकल स्टाफ से आग्रह किया है कि वो इस महामारी से लड़ने में अपना योगदान दें. और वो दे भी रहे हैं.

ये वही देश है जहां बड़े बड़े निज़ी अस्पताल अपने नोटिस बोर्ड पर लिख कर लगा रहे हैं 'ऑक्सीजन सप्लाई की ज़िम्मेदारी सरकार की है'. कल को निज़ी अस्पताल लिख कर टांग देंगे 'आयुष्मान भारत जैसी किसी योजना के लाभार्थी का इलाज यहाँ नहीं किया जाता है' तब आप कहाँ जाएँगे? किससे जवाब माँगेंगे?

सरकारी बैंकों के 1000 से ज़्यादा स्टाफ कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ कर काल कवलित हो चुके हैं. परंतु फिर भी मात्र 48 घंटे में शाखा को सैनीटाइज़ करने के बाद दुबारा खोल दिया जाता है ताकि आम जनता को परेशानी ना हो. मेरा एक दोस्त जो कि बैंक में ही था, मात्र 32 साल की उम्र में कोविड का शिकार हो गया. अभी 3 साल पहले उसकी शादी हुई थी और 1 साल से कम उम्र की उसकी बच्ची है. अपनी आंखों के सामने 25 साल, 28 साल, 24 साल की उम्र के बैंकर्स को ज़िंदगी की जंग हारते हुए देख रहा हूँ पर कुछ भी कर पाने में असमर्थ हूँ. हर रोज़ मेरे जैसे 10 लाख बैंकर्स अपनी जान हथेली पर रख कर अपने घरों से निकलते हैं, आम जनता से रूबरू होते हैं, बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के, बिना पीपीई किट के. सरकार अभी तक इन 10 लाख बैंकर्स को वैक्सीन तक नहीं लगवा पाई है जबकि सरकारी दस्तावेजों में हमें 'फ्रंट लाइन वर्कर्स' और 'एसेंशियल सर्विस' का तमगा दिया गया है.

खैर,देर सवेर ये कठिन वक़्त भी गुज़र जाएगा, लेकिन देश की प्रायोरिटी क्या है ये सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है. देश को ये समझना होगा कि मुसीबत के इस समय पर कौन लोग हैं जो देश के लिए आगे आ कर खड़े हैं. किसी सरकारी कर्मचारी को 'रिश्वतखोर' 'कामचोर' बोलने वाले जो खुद 'वर्क फ्रॉम होम' कर रहे हैं उनके लिए भी प्रार्थना करता हूं कि भगवान ना करे कि उन्हें या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को इस समय हमारे देश के जर्जर सिस्टम से जूझना पड़े, क्योंकि तुमने कभी उस जर्जर सिस्टम के पीछे की वजह को जानने की जदोजहद नहीं कि, कभी ये नहीं सोचा कि उस सिस्टम को कैसे अच्छा बनाया जा सकता है. तुम्हें तो बस उस सिस्टम की कमियां निकाल कर उसका मीम बनाना, उसका जोक बनाना अच्छा लगा.

इस समय हर 'रिश्वतखोर' पुलिस वाला मैदान में है, हर 'कामचोर' बैंक वाला शाखा में बैठा है, हर 'मक्कार' नगर निगम कर्मी सड़कें साफ कर रहा है, कूड़ा उठा रहा है, हर 'लॉस मेकिंग' पब्लिक सेक्टर इस समय वो काम कर रहा है जो वो हमेशा करता आया है, और वो है 'देशसेवा'.

जाते जाते एक सवाल छोड़ जाता हूँ आपके लिए. आर्टिकल 21 पढ़ा है कभी आपने? नहीं पढ़ा हो तो गूगल करके पढियेगा. आपका अपना हक किस तरह से आपके किसी काम नहीं आएगा ये समझना बहुत ज़रूरी है आपके लिये 🙏

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