Lakhan Pratap Raghuwanshi

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राधे राधे जी
20/05/2026

राधे राधे जी

🚆 सफलता की कहानी 🚆"भारतीय रेलवे की पटरियों पर दौड़ती सफलता की एक अनूठी दास्तां"🌟 सफलता की गूंज:शासकीय आईटीआई विदिशा के ग...
25/04/2026

🚆 सफलता की कहानी 🚆
"भारतीय रेलवे की पटरियों पर दौड़ती सफलता की एक अनूठी दास्तां"
🌟 सफलता की गूंज:
शासकीय आईटीआई विदिशा के गौरव श्री शंकर रघुवंशी की प्रेरणादायक यात्रा, जिन्होंने भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट (ALP) बनकर अपने सपनों को साकार किया।
🎓 शिक्षा से सफलता तक:
सत्र 2016-2018 (इलेक्ट्रीशियन ट्रेड) के छात्र रहे शंकर रघुवंशी ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे शासकीय आईटीआई विदिशा का नाम रोशन किया है।
उन्होंने ALP भर्ती 2024 में शानदार प्रदर्शन करते हुए—
🚆 वेस्ट सेंट्रल रेलवे (WCR) में 6वीं रैंक
🚆 भोपाल डिवीजन में 4वीं रैंक प्राप्त की
💪 संघर्ष से सफलता तक का सफर:
विदिशा जिले के तहसील गुलाबगंज के छोटे से गांव बिलराई के निवासी शंकर एक साधारण कृषक परिवार से हैं।
उनके पिता श्री बलराम सिंह रघुवंशी उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे।
2018 में आईटीआई पूर्ण करने के बाद लंबा इंतजार रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी—
👉 2 वर्षों तक NGO और जिला शिक्षा परियोजना में कार्य किया
👉 खुद को लगातार तैयार करते रहे
और जब 2024 में मौका मिला, तो उन्होंने अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया ✨
👉 परिवार के पहले सरकारी कर्मचारी बनने का गौरव हासिल किया
🇮🇳 देश सेवा का संकल्प:
वर्तमान में शंकर लखनऊ और भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
आने वाले समय में वे भोपाल डिवीजन में पदस्थ होकर भारतीय रेलवे—जो देश की जीवन रेखा है—में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
💰 शानदार शुरुआत:
👉 प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की शुरुआत
👉 शुरुआती वेतन लगभग ₹60,000+, जो अनुभव के साथ बढ़ता जाएगा
💬 शंकर का प्रेरणादायक संदेश:
"लोको पायलट बनना सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं है, बल्कि लाखों यात्रियों की उम्मीदों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाना है।
आईटीआई की शिक्षा ने मेरे तकनीकी आधार को मजबूत किया और मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया।"
🌟 प्रेरणा:
शंकर रघुवंशी की यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखता है।

🚨 गोरखपुर की 9वीं की छात्रा के साथ दरिंदगी की हदें पार: 4 महीने तक 10 लोगों ने बनाया हवस का शिकार! ........:::इंसानियत क...
19/04/2026

🚨 गोरखपुर की 9वीं की छात्रा के साथ दरिंदगी की हदें पार: 4 महीने तक 10 लोगों ने बनाया हवस का शिकार! ........
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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आई है। चिलुआताल इलाके से 4 महीने पहले लापता हुई 14 साल की एक मासूम छात्रा जब पुलिस को मिली, तो उसकी आपबीती सुनकर सबकी आंखें नम हो गईं।
इस मासूम बच्ची को इन 4 महीनों में एक वस्तु की तरह 10 अलग-अलग लोगों के हाथों बेचा गया। रूह कांप जाती है यह जानकर कि आरोपियों ने उसे कहीं 'बहन' तो कहीं 'पत्नी' बनाकर रखा और उसके साथ गैंगरेप किया। विरोध करने पर उसे बुरी तरह पीटा जाता था।
पुलिस ने अब इस मामले में गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट (POCSO) के तहत केस दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी है। समाज में छिपे ऐसे दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

घटना की पृष्ठभूमि (गायब होना)
यह मामला 4 महीने पहले गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र से शुरू हुआ था। छात्रा अचानक लापता हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने काफी तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला।
मामले का खुलासा और बरामदगी
हाल ही में पुलिस को सूचना मिली कि लड़की को आगरा के पास देखा गया है। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए बच्ची को बरामद किया और जब उसे वापस लाया गया, तो उसने अपनी जो आपबीती सुनाई, उसने सभी के होश उड़ा दिए।
छात्रा की आपबीती: क्या हुआ था उन 4 महीनों में?
छात्रा ने रोते हुए पुलिस को बताया कि इन 4 महीनों में उसे एक वस्तु की तरह इस्तेमाल किया गया:
अपहरण और खरीद-फरोख्त: गायब होने के बाद उसे अलग-अलग शहरों में ले जाया गया। बच्ची के मुताबिक, उसे 10 अलग-अलग लोगों के हाथों बेचा या सौंपा गया।
रिश्तों का ढोंग: आरोपियों ने उसे प्रताड़ित करने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाए। किसी ने उसे 'बहन' बनाकर अपने पास रखा और दुष्कर्म किया, तो किसी ने उसे जबरन 'पत्नी' बनाकर रखा और उसके साथ दरिंदगी की।
लगातार प्रताड़ना: बच्ची ने बताया कि उसे बंधक बनाकर रखा जाता था और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। 10 लोगों ने मिलकर उसके साथ बार-बार गैंगरेप किया।
पुलिस की कार्रवाई
बच्ची के बयान और मेडिकल जांच के आधार पर पुलिस ने इस मामले में कठोर रुख अपनाया है:
FIR में बदलाव: पहले जो मामला गुमशुदगी का था, उसे अब गैंगरेप (376D) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराओं में बदल दिया गया है।
गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
ट्रैकिंग: पुलिस उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है कि बच्ची गोरखपुर से बाहर कैसे गई और किन-किन बिचौलियों ने उसे आगे बेचा।
वर्तमान स्थिति यह है
छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसे फिलहाल काउंसलिंग दी जा रही है क्योंकि वह गहरे सदमे (ट्रॉमा) में है। कोर्ट में उसके 164 के बयान दर्ज कराए जा रहे हैं
यह घटना प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है कि कैसे एक नाबालिग को महीनों तक एक शहर से दूसरे शहर ले जाया गया और किसी को भनक तक नहीं लगी।

, अत्यंत दुखद सूचना :, आज वृंदावन की पावन यमुना नदी में दर्शनार्थियों से भरा स्टीमर डूबने की अत्यंत दुःखद घटना में कई श्...
12/04/2026

, अत्यंत दुखद सूचना :

, आज वृंदावन की पावन यमुना नदी में दर्शनार्थियों से भरा स्टीमर डूबने की अत्यंत दुःखद घटना में कई श्रद्धालुओं के असामयिक निधन का समाचार हृदय को व्यथित करने वाला है।
हे ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें एवं शोक संतप्त परिवारों को इस कठिन समय में संबल दें।
मैं, , इस दुःख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हो और मेरा उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध है पीड़ित परिवार जनों की हर संभव मदत करें ।

ॐ शांति 🙏

OmShanti Prayers StayStrong Mathura Support HumanityFirst

फोटो में दिख रहे शख्स का नाम है ओमप्रकाश श्रीवास्तव।शिवपुरी सहित कई जिलों में कलेक्टरी की इन्होंने। एक्साइज कमिश्नर मध्य...
07/04/2026

फोटो में दिख रहे शख्स का नाम है ओमप्रकाश श्रीवास्तव।शिवपुरी सहित कई जिलों में कलेक्टरी की इन्होंने। एक्साइज कमिश्नर मध्यप्रदेश रहे। पिछले साल तक मध्यप्रदेश के होम सेक्रेटरी थे ,अब नर्मदा की नौकरी कर रहे हैं। ओपी की तारीफ दर्जनों बार कर चुके हम पर आज केवल इनकी मूंछों की चर्चा की जाएगी।
ओपी की मूंछें अब नर्मदा की बाढ़ सी हैं।वे ऊपरी ओंठ के तट को डुबा चुकी और पूरी आशंका है कि नीचे वाला ओठ भी जल्द ही उनकी चपेट मे आ सकता है। ओपी के अलावा भी ऊपर वाले ने जिन्हें भी नर बना कर पैदा किया ,उनमें से ज़्यादातर की यथासमय मूँछें निकलती हैं।आदमी के अलावा चूहे बिल्ली शेर चीते सब शामिल है इसमें।पर मूँछों पर ताव देना बस आदमियों ने सीखा।इस पृथ्वी पर जगह जगह बसे आदमियों मे से बस हिंदुस्तानी मूँछों पर गर्वित हुए।इसे सजाने संवारने और इसके लिए कट मरने की जितनी कहानियाँ हमारे देश मे कही सुनी जाती है उसकी कोई दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है।

एक रिसर्च ने बताया था कभी कि मूँछ रखने वाले ज़्यादा खर्चीले होते हैं ,इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि मुछमुंडे कंजूस होते हैं ,और जहां तक लड़कियों की बात है ,उन्हें उदार और खर्चीले पुरूष ज़्यादा पसंद आते हैं।ऐसे में आप कडके हो तो तो शुरूवाती झांकी बनाने में ,मूँछें आपकी थोड़ी बहुत मदद कर सकती है।
मूछें आपकी सेहत के लिये भी फ़ायदेमंद हैं।ये कैटेलिटिक कनवर्टर वाला एयर फ़िल्टर है, छोटी बड़ी बीमारियों के वायरसों को आपकी नाक ,मुँह में घुसने से रोकने वाला गार्ड है।यक़ीन ना हो तो किसी डॉक्टर से पूछ लें ,वो भी इस बात की तस्दीक़ ही करेगा।मूँछ रखने वाले ,मूँछों को मर्दानगी का थर्मामीटर मानते है।हालाँकि एक पर्शियन राजकुमारी ताज अजर कल सुल्ताना ,अपनी मूँछों की वजह से ही बेहद खूबसूरत मानी गई।उनकी ख़ूबसूरती का आलम ये था कि उन्होंने तीन बार पति बदले और प्रेमियों की कभी गिनती नहीं की।मूंछें उनके साथ आखरी वक्त तक साथ बनी रही और उनके पतियों और प्रेमियों से ज़्यादा वफादार साबित हुई।

कभी मूँछों वाले ,बात वाले माने जाते थे।मैंने बचपन में एक कहानी पढ़ी थी।उसके हिसाब से एक ऐसे ही अपनी मूँछो पर गर्वित सरदार को उनके इलाक़े के बनिये ने,उनकी मूँछ का एक बाल गिरवी रख कर ,उन्हें लाखों रूपये उधार दे दिये थे।यह वो वक्त था जब बंदा मूँछें झुकाने के बजाय गर्दन दे देना पसंद करता था।वैसे लोग अब रह नही गये है इसलिये अब मूँछों की वजह से उधार मिलने की गुंजाइश भी नहीं रह गई है।

इतिहासकार यह भी बताते हैं कि मुस्लिम काल तक भारत में दाढ़ी-मूँछ का चलन अधिक रहा। अपने चेहरे पर मूँछों को जगह ना देने वाले अंग्रेज़ों के राजा बनते ही हिंदुस्तानियों के चेहरे से भी दाढ़ी-मूँछ गायब होने लगे।मुसलमानों ने मूँछ बचाये रखी।हैदराबाद के अंग्रेज़ रेसिडेंट किर्कपैट्रिक ने मुस्लिम नवाबों की तरह जब मूँछ रखना शुरू किया तो बात इंग्लैंड तक पहुँच गई कि कहीं वो मुसलमान तो नहीं हो गए हैं और नतीजतन उन्हें अपना बोरिया बिस्तर लपेट कर ,इंग्लैंड वापस लौटना पड़ा

मुग़ल ए आज़म पृथ्वीराज कपूर की मूँछों की भी आरती उतारी गई और उनके साहब ए आलम दिलीप कुमार की मूँछों पर भी तब की कमसिन कन्यायें मर मिटी थी।फिर अनिल कपूर की मूँछों ने उन्हें स्टॉर बनाया।वीरप्पन जैसा डकैत भी जब तक जिंदा रहा अपनी मशहूर मूँछों पर ताव देता रहा। शराबी फिल्म के नत्थूलाल की मूंछें भी मशहूर हुईं और मूंछों की वजह से हवाई जहाज से पाकिस्तान में गिरने वाले पायलट अभिनंदन भी मशहूर हुए। यह बात भी बताने जैसी है कि कभी मूँछें और दाढ़ी ,एक थाली में खाने वाले वाली सहेलियां थी।जहाँ एक तो वहीं दूसरी भी मौजूद।फिर शादीशुदा सहेलियों की तरह कभी कभी का साथ हुआ इनका।पर इनका साथ दिखने का चलन भी अब तक बना हुआ है।

पुराने ज़माने में घनी कड़कदार मूँछे पाली जाती थी।मोम की पॉलिश की जाती थी उन पर।जिससे वो और उन्हें धारण करने वाला बंदा ताव दे सके उन पर ,दमदार दिखे।प्रतियोगिताएँ होती थी मूँछों पर नीबू खडा करने की।ऐसी मूँछें अब ग़ायब हो चली है और राजस्थान के फ़ाईव स्टॉर होटलों के मेन गेट पर खड़े दरबानों के चेहरों पर ही बची रह गई है।

बात ओपी की मूंछों से शुरू हुई थी। वे नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के बाद ये विशालकाय मूछें बनाए रखेंगे या नहीं ये राष्ट्रीय चर्चा का विषय है। वैसे इस मामले मे मेरी ओपी को सलाह यह कि मूँछों का स्वामी होता है राहू।यदि आपकी कुंडली में राहू अच्छे घर में बैठा है ,उच्च का है ,स्वग्रही है ,तो शौक़ से मूँछें रखिए।यदि ऐसा नहीं तो मुंछमुंडे ही बने रहने में भलाई है।
साभार...
Lakhan Pratap Singh Raghuwanshi
#दोस्ती

07/04/2026

अमन गुप्ता की 2019 मै मौत हो गई। हार्ट अटैक आया। 54 साल के थे।
उनके पास ₹50 लाख की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 11 साल तक बिना किसी डिफॉल्ट के प्रीमियम भरा।

उनकी पत्नी ने डेथ क्लेम फाइल किया।
इंश्योरेंस कंपनी ने कहा: "हमें जांच करनी होगी।"
उन्होंने 4 साल तक जांच की। डॉक्यूमेंट्स मांगते रहे। वह जमा करती रहीं। वे और मांगते रहे।

वह होम लोन की EMI नहीं दे पा रही थीं। कार बेच दी। रिश्तेदारों से उधार लिया।
2022 में, उन्होंने आखिरकार क्लेम रिजेक्ट कर दिया। कहा कि अमन को पहले से कोई बीमारी थी जिसके बारे में उन्होंने "नहीं बताया।"
वह बीमारी: थोड़ा हाई ब्लड प्रेशर। 2015 में एक रूटीन चेकअप में पता चला।
कभी इलाज नहीं हुआ। कभी दवा नहीं दी।
वह IRDAI गईं। फिर कंज्यूमर कोर्ट गईं।
कोर्ट ने कहा: ऐसी बीमारी जिसका कभी इलाज नहीं हुआ और जिसने कभी उनकी सेहत पर असर नहीं डाला, उसका इस्तेमाल 11 साल बाद क्लेम रिजेक्ट करने के लिए नहीं किया जा सकता।
₹50 लाख देने का ऑर्डर दिया गया। प्लस 2019 से 9% इंटरेस्ट। प्लस मेंटल हैरेसमेंट के लिए ₹1 लाख।

उन्होंने एक विधवा को 3 साल इंतज़ार करवाया। फिर उसे रिजेक्ट कर दिया।
कोर्ट ने उसे सब कुछ वापस कर दिया। इंटरेस्ट के साथ।
इस पोस्ट को सेव करें। अगर कोई इंश्योरेंस क्लेम "नॉन-डिस्क्लोजर" का हवाला देकर रिजेक्ट किया जाता है — तो लड़ें।
कोर्ट ने लगातार उन इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ फैसला दिया है जो रिजेक्शन के लिए छोटी-मोटी, बिना इलाज वाली कंडीशन का इस्तेमाल करती हैं।

06/04/2026
बहुत ही असहनीय एवं हृदय विदारक घटना — #अजलेश्वर गांव के तीन होनहार बच्चों की तालाब में नहाने के दौरान डूबने से दुखद मृत्...
06/04/2026

बहुत ही असहनीय एवं हृदय विदारक घटना —

#अजलेश्वर गांव के तीन होनहार बच्चों की तालाब में नहाने के दौरान डूबने से दुखद मृत्यु हो गई।

मयंक रघुवंशी पुत्र अवधेश रघुवंशी, उम्र: 16 वर्ष
ओम रघुवंशी पुत्र: सतीश रघुवंशी, उम्र: 15 वर्ष
देव रघुवंशी पुत्र: राकेश रघुवंशी, उम्र: 14 वर्ष

ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके माता-पिता व समस्त परिवार को इस असीम दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
हम सभी की गहरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं।

ॐ शांति ॐ

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