07/04/2026
फोटो में दिख रहे शख्स का नाम है ओमप्रकाश श्रीवास्तव।शिवपुरी सहित कई जिलों में कलेक्टरी की इन्होंने। एक्साइज कमिश्नर मध्यप्रदेश रहे। पिछले साल तक मध्यप्रदेश के होम सेक्रेटरी थे ,अब नर्मदा की नौकरी कर रहे हैं। ओपी की तारीफ दर्जनों बार कर चुके हम पर आज केवल इनकी मूंछों की चर्चा की जाएगी।
ओपी की मूंछें अब नर्मदा की बाढ़ सी हैं।वे ऊपरी ओंठ के तट को डुबा चुकी और पूरी आशंका है कि नीचे वाला ओठ भी जल्द ही उनकी चपेट मे आ सकता है। ओपी के अलावा भी ऊपर वाले ने जिन्हें भी नर बना कर पैदा किया ,उनमें से ज़्यादातर की यथासमय मूँछें निकलती हैं।आदमी के अलावा चूहे बिल्ली शेर चीते सब शामिल है इसमें।पर मूँछों पर ताव देना बस आदमियों ने सीखा।इस पृथ्वी पर जगह जगह बसे आदमियों मे से बस हिंदुस्तानी मूँछों पर गर्वित हुए।इसे सजाने संवारने और इसके लिए कट मरने की जितनी कहानियाँ हमारे देश मे कही सुनी जाती है उसकी कोई दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है।
एक रिसर्च ने बताया था कभी कि मूँछ रखने वाले ज़्यादा खर्चीले होते हैं ,इसका मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि मुछमुंडे कंजूस होते हैं ,और जहां तक लड़कियों की बात है ,उन्हें उदार और खर्चीले पुरूष ज़्यादा पसंद आते हैं।ऐसे में आप कडके हो तो तो शुरूवाती झांकी बनाने में ,मूँछें आपकी थोड़ी बहुत मदद कर सकती है।
मूछें आपकी सेहत के लिये भी फ़ायदेमंद हैं।ये कैटेलिटिक कनवर्टर वाला एयर फ़िल्टर है, छोटी बड़ी बीमारियों के वायरसों को आपकी नाक ,मुँह में घुसने से रोकने वाला गार्ड है।यक़ीन ना हो तो किसी डॉक्टर से पूछ लें ,वो भी इस बात की तस्दीक़ ही करेगा।मूँछ रखने वाले ,मूँछों को मर्दानगी का थर्मामीटर मानते है।हालाँकि एक पर्शियन राजकुमारी ताज अजर कल सुल्ताना ,अपनी मूँछों की वजह से ही बेहद खूबसूरत मानी गई।उनकी ख़ूबसूरती का आलम ये था कि उन्होंने तीन बार पति बदले और प्रेमियों की कभी गिनती नहीं की।मूंछें उनके साथ आखरी वक्त तक साथ बनी रही और उनके पतियों और प्रेमियों से ज़्यादा वफादार साबित हुई।
कभी मूँछों वाले ,बात वाले माने जाते थे।मैंने बचपन में एक कहानी पढ़ी थी।उसके हिसाब से एक ऐसे ही अपनी मूँछो पर गर्वित सरदार को उनके इलाक़े के बनिये ने,उनकी मूँछ का एक बाल गिरवी रख कर ,उन्हें लाखों रूपये उधार दे दिये थे।यह वो वक्त था जब बंदा मूँछें झुकाने के बजाय गर्दन दे देना पसंद करता था।वैसे लोग अब रह नही गये है इसलिये अब मूँछों की वजह से उधार मिलने की गुंजाइश भी नहीं रह गई है।
इतिहासकार यह भी बताते हैं कि मुस्लिम काल तक भारत में दाढ़ी-मूँछ का चलन अधिक रहा। अपने चेहरे पर मूँछों को जगह ना देने वाले अंग्रेज़ों के राजा बनते ही हिंदुस्तानियों के चेहरे से भी दाढ़ी-मूँछ गायब होने लगे।मुसलमानों ने मूँछ बचाये रखी।हैदराबाद के अंग्रेज़ रेसिडेंट किर्कपैट्रिक ने मुस्लिम नवाबों की तरह जब मूँछ रखना शुरू किया तो बात इंग्लैंड तक पहुँच गई कि कहीं वो मुसलमान तो नहीं हो गए हैं और नतीजतन उन्हें अपना बोरिया बिस्तर लपेट कर ,इंग्लैंड वापस लौटना पड़ा
मुग़ल ए आज़म पृथ्वीराज कपूर की मूँछों की भी आरती उतारी गई और उनके साहब ए आलम दिलीप कुमार की मूँछों पर भी तब की कमसिन कन्यायें मर मिटी थी।फिर अनिल कपूर की मूँछों ने उन्हें स्टॉर बनाया।वीरप्पन जैसा डकैत भी जब तक जिंदा रहा अपनी मशहूर मूँछों पर ताव देता रहा। शराबी फिल्म के नत्थूलाल की मूंछें भी मशहूर हुईं और मूंछों की वजह से हवाई जहाज से पाकिस्तान में गिरने वाले पायलट अभिनंदन भी मशहूर हुए। यह बात भी बताने जैसी है कि कभी मूँछें और दाढ़ी ,एक थाली में खाने वाले वाली सहेलियां थी।जहाँ एक तो वहीं दूसरी भी मौजूद।फिर शादीशुदा सहेलियों की तरह कभी कभी का साथ हुआ इनका।पर इनका साथ दिखने का चलन भी अब तक बना हुआ है।
पुराने ज़माने में घनी कड़कदार मूँछे पाली जाती थी।मोम की पॉलिश की जाती थी उन पर।जिससे वो और उन्हें धारण करने वाला बंदा ताव दे सके उन पर ,दमदार दिखे।प्रतियोगिताएँ होती थी मूँछों पर नीबू खडा करने की।ऐसी मूँछें अब ग़ायब हो चली है और राजस्थान के फ़ाईव स्टॉर होटलों के मेन गेट पर खड़े दरबानों के चेहरों पर ही बची रह गई है।
बात ओपी की मूंछों से शुरू हुई थी। वे नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के बाद ये विशालकाय मूछें बनाए रखेंगे या नहीं ये राष्ट्रीय चर्चा का विषय है। वैसे इस मामले मे मेरी ओपी को सलाह यह कि मूँछों का स्वामी होता है राहू।यदि आपकी कुंडली में राहू अच्छे घर में बैठा है ,उच्च का है ,स्वग्रही है ,तो शौक़ से मूँछें रखिए।यदि ऐसा नहीं तो मुंछमुंडे ही बने रहने में भलाई है।
साभार...
Lakhan Pratap Singh Raghuwanshi
#दोस्ती