Sanjeev Grover

Sanjeev Grover nothing to escalate for my self who knows me whom I am

30/12/2024
24/10/2024

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13/10/2024
Once More Our NGO will be receiving Award from Celebrity  Poonam Dhillon Ji For Our Working in Needy Peoples in Society ...
29/08/2024

Once More Our NGO will be receiving Award from Celebrity Poonam Dhillon Ji For Our Working in Needy Peoples in Society .Thanks For organizing Committee For considering us

25/08/2024

Faridabad BJPJila Adyaksh, All Mandal Adyaksh, Bjp KE Manoneet Parshad KE Jawan Bhatize ki death per Janne ka time nahi,Itna bada dukh sazha karne main dikkat

Aaj 1 e block ki safai karaye gayi
24/08/2024

Aaj 1 e block ki safai karaye gayi

18/08/2024

*एक जंगल में मंदविष नामक सांप रहता था और बहुत बूढ़ा हो चुका था। बूढ़ा और कमजोर होने के कारण अपना शिकार करने में असमर्थ था। एक दिन रेंगता हुआ वह तालाब के किनारे पहुँच गया और वहीं लेट गया और कुछ दिनों तक वह इसी तरह लेटा रहा।*

*उसी तालाब में बहुत सारे मेंढक भी रहते थे उन्होंने तालाब किनारे लेटे हुए सांप की हालत के बारे में मेंढकों के राजा जालपाद को बतलाया। मेंढकों का राजा जालपाद उस सर्प के बारे में जानने के लीये सर्प के पास पहुंचा और जालपाद बोला – “ हे सर्पराज ! मैं मेंढकों का राजा जालपाद हूँ और इसी तालाब में रहता हूँ। आपकी हालत के बारे में कुछ मेंढकों ने मुझे बतलाया था। आप इतने सुस्त क्यूँ पड़े हुए हो? आपकी यह हालत किसने की है? क्या आप हमें कुछ बतलाओगे?”*

*मेंढकों के राजा से इस प्रकार के प्रश्न सुनकर सर्प ने बनावटी कहानी बनाई और बोला- “ हे मेंढकों के राजा ! मैं एक गाँव के पास रहता था। एक दिन एक ब्राम्हण के पुत्र का पैर मेरे ऊपर पड़ गया था और मैंने उसे काट दिया जिससे उस ब्राम्हण पुत्र की मृत्यु हो गई थी। उस ब्राम्हण ने मुझे श्राप दिया कि मुझे किसी तालाब के किनारे जाकर मेंढकों की सेवा करनी होगी और उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर घुमाना होगा।“*

*सर्प के मुंह से इस प्रकार के बातें सुनकर मेंढकों का राजा जालपाद बहुत खुश हुआ उसने सोचा कि अगर इस सर्प से मेरी दोस्ती हो जाती है और मैं इस सर्प की पीठ पर बैठकर सवारी करूँगा तो दल का कोई भी दूसरा शक्तिशाली मेंढक मेरे खिलाफ विद्रोह भी नहीं कर सकेगा।*

*जालपाद को कुछ सोचता हुआ देख सर्प बोला – “ भद्र ! मैं सोच रहा था कि मुझे उस ब्राम्हण का श्राप भोगना पड़ेगा तो किसी और मेंढक को अपनी पीठ पर बैठाकर घुमाने से अच्छा है मैं मेंढकों के राजा को ही अपनी पीठ पर बिठ्लाऊ। अगर आप चाहें तो मेरी पीठ पर बैठ कर देख सकते हैं।”*

*मेंढकों के राजा जालपाद ने सांप की बात पर विश्वास कर लिया और झिझकते हुए सांप की पीठ पर बैठ गया। सांप ने उसे पूरा तालाब घुमाया और लाकर पुनः उसी स्थान पर छोड़ दिया। मेंढक (जालपाद) को सांप की गुदगुदी पीठ पर बैठने में बहुत आनंद आया और वह रोज सांप की पीठ पर बैठकर तालाब में घूमने का आनंद लेता और अपने सजातियों को सांप का भय दिखलाता।*

*एक दिन जब वह सांप की पीठ पर सवारी कर रहा था तब सर्प बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। मेंढक (जालपाद ) ने पूछा – “ आज आप इतने धीरे-धीरे क्यूँ चल रहे हो ? आज सवारी में मजा नहीं आ रहा है।”*

*सर्प बोला – “ मित्र ! मुझे कई दिनों से भोजन नहीं मिला है इसीलिए कमजोरी आ गई है और मुझसे चला नहीं जा रहा है।”*

*सर्प की बात सुनकर मेंढकों का राजा जालपाद बोला – “ अरे मित्र ! इतनी छोटी सी बात है , इस तालाब में हजारों मेंढक है, जो तुम्हारा प्रिय आहार हैं। तुम चाहो तो इनको अपना आहार बना लिया करो।”*

*मंदविष सांप के मानो मन की हो गई वह तो यही चाहता था। अब वह प्रतिदिन बिना कुछ मेहनत किये कुछ मेंढकों को खा लेता था। इधर मूर्ख जालपाद यह भी नहीं समझ सका कि अपने क्षणिक आनंद के लिए वह अपने ही वंश का नाश करवा रहा है।*

*अब मेंढकों का राजा जालपाद प्रतिदिन सांप के पीठ पर बैठकर तालाब की सबारी करता और सांप तालाब में रहने वाले मेंढकों को खाकर अपना पेट भरता था।*

*एक दिन एक दूसरे सांप ने मेंढक को सांप की सवारी करते देखा तो उसे अच्छा नहीं लगा और कुछ देर बाद मंदविष के पास आकर बोला – “ मित्र तुम यह प्रकृति विरुद्ध कार्य क्यूँ कर रहे हो ? ये मेंढक तो हमारे भोजन हैं और तुम इन्हें अपनी पीठ बार बैठा कर सवारी करवा रहे हो ?”*

*मंदविष बोला- “ ये सारी बातें तो मैं भी जानता हूँ और अपने लिए उपयुक्त समय का इन्जार कर रहा हूँ जब इस तालाब में कोई भी मेंढक नहीं बचेगा।”*

*बहुत दिनों तक इसी प्रकार चलता रहा एक दिन ऐसा आया कि तालाब में जालपाद के परिवार को छोड़ कर कोई दूसरा मेंढक नहीं बचा। मंदविष सांप को भूख लगी और वो जालपाद से बोला – “ अब इस तालाब में कोई मेंढक नहीं बचा है और मुझे बहुत भूख लग रही है।”*

*जालपाद बोला- “ इसमें मैं क्या कर सकता हूँ इस तालाब में मेरे सगे-संबंधियों को छोड़ का तुम सारे मेंढकों को खा चुके हो। अब तुम अपने भोजन की व्यवस्था खुद करो।”*

*जालपाद की बात सुनकर मंदविष सांप बोला – “ ठीक है मुझे तो बहुत भूख लग रही है मैं तुम्हारे परिवार को छोड़ देता हूँ पर मुझे अपनी भूख मिटाने के लिए तुम्हे खाना पड़ेगा।”*

*मंदविष सांप की बात सुनकर जालपाद के पैरो तले जमीन खिसक गई और उसने अपनी जान वचाने के लिए अपने सगे संबंधियों तक को खाने की अनुमति दे दी। देखते ही देखते सांप ने जालपाद के सभी रिश्तेदारों और परिवारों वालों को खा लिया। अब तालाब में मेंढकों में सिर्फ जलपाद बचा था। मंदविष सांप जलपाद से बोला – “ अब इस तालाब में तुम्हें छोड़कर कोई भी मेंढक नहीं बचा है और मुझे बहुत भूख लगी है अब तुम ही बतलाओ मैं क्या करूँ ?” मंदविष सांप की बात सुनकर जालपाद मेंढक डर गया और बोला – “ मित्र ! तुम्हारी मित्रता में मैनें अपने वंश और परिवार के लोगों को खो दिया है अब तुम कहीं और जाकर अपना भोजन देख लो।”*

*जालपाद की बात सुनकर मंदविष सांप बोला -“ मित्र ! तुम्हारा कहना मैं मान लूँगा। तुमने अपने स्वार्थ के कारण अपने जन्मजात दुश्मन को अपना मित्र बनाया और अपने सगे संबंधियों को मेरा भोजन बनवाया पर अब तुम अकेले इस दुनियां में रहकर क्या करोगे ?”*

*इतना बोलकर सांप ने जालपाद मेंढ़क को भी मारकर अपना आहार बना लिया ।*

*शिक्षा –*
*इस कहानी को आज के परिदृश्य में देखे तो मंदविष नामक सर्प एक राक्षसी ताकत है जो पूरी दुनिया में अपना राज स्थापित करना चाहते हैं। वही मेंढकों के राजा जालपाद जातिवादी पार्टियां है , जो मंदविष रूपी सांप की क्षुधा पूर्ति अपने भाई बंधुओ की कुर्बानी देकर कर रहे है जिससे कि वह शासन सत्ता के मजे कर सकें

Kya hum Aisa Kar payenge
09/08/2024

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09/08/2024

Faridabad kura point ka haal

02/08/2024

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