07/03/2025
अमीर लोगो की तरह सोचना सीखिए ...........
दो तरह के लोग हैं दुनिया में rich vs poor!बाहर से दोनों देखने में एक जैसे होते हैं दोनों की डिलीवरी नौ महीने में होती है,दोनों को दो आँखें दो कान दो हाथ दो पैर दो किडनी एक दिल एक दिमाग़ होता है यानी सबका ऊपर का structure एक जैसा ही है hardware same है लेकिन software अलग अलग run होता है,जिसके कारण उनके बैंक बैलेंस में काफ़ी अंतर होता है !और ये सॉफ्टवेर है उसकी life की philosophy ,किसी भी व्यक्ति की philosophy ये decide करती है कि उसके जीवन में पैसे होंगे कि नहीं होंगे ,आपके पास कम ज़्यादा या बिलकुल नगण्य जितना भी धन है वो आपकी philosophy के कारण है,आप धन ना होने का कारण बाहर ना खोजें वो आपके अंदर है,अगर बाहर खोजेंगे तो खोजते रह जाएँगे लेकिन आपको मिलेगा नहीं एक दिन आप खो जाएँगे लेकिन कारण आपको नहीं मिलेगा!मेरी विनती है request है कि अगर सच में आप धन सम्पदा कमाना चाहते हैं जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो इस लेख को पढ़ने के बाद आप ख़ुद में गोता लगाके देखिए ,अपने आप को देखना शुरू कीजिए आत्म मंथन कीजिए खुली नाव छह घंटे छह दिन छह महीने में कहाँ पहुँचेगी ये हवा पे निर्भर नहीं करती क्यूकी हवा सबके लिए बराबर बह रही है,ये आपके ऊपर निर्भर है की आप अपनी नाव चलाते कैसे हैं! ठीक इसी तरह sell target को set करने के बाद सही गुरुओं के मार्ग़दर्शन में सही दिशा में मेहनत करके आप यहाँ सफल होते हैं! richest people on the earth has different philosophy and poor people of the world has different philosophy,दोनों की philosophy में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है,rich अमीर आदमी का mindset और philosophy ये है वो ये सोचता है कि आज किए गये काम का result 3-4-5-10 बरस बाद कितना पैसा देगा उसकी खोपड़ी में हमेशा ये चलता रहता है,उसका दिमाग़ लंबे pipeline निर्माण में ज़्यादा लगा रहता है बनिस्पत इसके कि आज मैं पैसा कैसे कमाऊँ? Rich don’t believe in hard work rather they believe in smart work. poor people पैसे कमाने के लिए हमेशा गार्डन के नीचे का हिस्सा इस्तेमाल करते हैं,rich people पैसे कमाने के लिए हमेशा गार्डन के ऊपर के हिस्से का इस्तेमाल करते हैं,एक उदाहरण से इसे समझते हैं,2019 में हमारे घर में अड़ानी गैस पाइपलाइन अदाणी जी ने बिछाया उन्होंने कर्नाटक तमिलनाडु असम आदि दस बारह राज्यों में एक साथ ये पाइपलाइन पूरे देश के लगभग हर घर में बिछा दिया,निश्चित है कि इसके लिए उन्होंने पाँच छह साल पहले government को सेट किया होगा,कई कई गड्ढे खोदे होंगे पाइपलाइन बिछाया होगा,प्राकृतिक गैस रिफ़ाइनरी बनाई होंगी और ये भी तय है की उन 3-4-5 सालों में उन्होंने एक भी पैसे नहीं कमाए होंगे,उन्होंने इस प्रोसेस में दो चार अरब रुपये लगाये होंगे चार पाँच साल wait किया होगा यानी काफ़ी ज़्यादा पैसा effort और टाइम लगाकर भी उन पाँच सालों में उन्हें जीरो प्रॉफिट या रेवन्यू वापस मिला होगा,और इतना सबकुछ करने के बाद अदाणी गैस ने आपसे डिमांड क्या किया गैस आपूर्ति का 600-700 प्रतिमाह!
ठीक यही philosophy अपनाया डिश टीवी ने टाटा स्काई ने वोडाफोन ने जिन्होंने आपके घर से वो कला तार जिसमे copper wire होता था उसे टीवी के पीछे हम घुसा देते थे,हम मिडल क्लास लोग एक तार से चार चार पाँच पाँच टीवी चलाते थे बीस रुपये महीना देते थे, वो भी माँगने आता था तो कह देते थे कोई घर पे नहीं है कल आना,अबे कैसे कोई नहीं है तू घर पे ही तो है? उन्होंने चाहे डिश टीवी हो या टाटा स्काई आपको एक प्रलोभन दिया हम आपको साफ़ सुथरा प्रशारण देंगे फिर बाद में उन्होंने भी और ज़्यादा clear picture के लिए hd चैनल्स का प्रलोभन देकर गेम फँसाया,मेरे दोस्त आपके घर में ये डिश टीवी टाटा स्काई आदि 2011-2012-2013 जब भी डिश लगा हो डिश टीवी या tata sky वालों ने इसकी प्लैनिंग सात आठ साल पहले कर की होगी ,सेटेलाइट छोटे गये होंगे government के साथ बात हुई होगी,इंफ़्रास्ट्रक्चर बनाया गया होगा मेहनत की गई होगी,यानी सात आठ साल बस तीन ही काम effort लगाना टाइम लगाना और खरबों रुपये इन्वेस्टमेण्ट में लगाना जबकि प्रॉफिट या रेवेन्यू वापसी उन सात आठ सालों में जीरो मिला होगा,और इतना सब करके भी आठ सालों बाद उन्होंने कितना छोटा अमाउंट माँगा आपसे मात्र 300-400 रुपये प्रतिमाह! मुकेश अंबानी जी ने ढाई लाख करोड़ रुपये रिलायंस जिओ में लगाये आपके हाथ में जिओ मोबाइल 2017 में आया तो अंबानी साहब के दिमाग़ में ये 2007-2008-2009 यानी सात आठ साल पहले आया होगा
उन आठ सालों में उन्होंने समुद्र के अंदर optical फाइबर बिछाया होगा सेटेलाइट छोडे होंगे ,government से setting की होगी ,ना जाने कितना कुछ किया होगा,टाइम effort पैसा सात आठ साल लगाके जीरो कमाई की होगी,और इतना सब करके जब प्रोडक्ट आपके हाथ में दिया तो आपसे माँगा क्या डेढ़ सौ रुपये महीना!
तीनों rich people adani gas,satellite tv और जिओ की एक ही philosophy है सात आठ दस साल कुछ नहीं कमा रहे ,सात आठ दस सालों में करोड़ों अरबों रुपये लगने बेइंतहां मेहनत करके भी अन्य में बहुत कम रुपये customer से माँग रहे हैं क्युँकि उनका फ़ंडा बड़ा क्लियर है की वो एक आदमी से सौ रुपये ना कमाकर सौ आदमी से एक एक रुपया कमाने में ज़्यादा विश्वास करते हैं,इनका हमेशा long vision long sightedness या दूर दृष्टि रहती है,लेकिन poor people का philosophy इसके बिलकुल उलट है हालाँकि rich poor लोग ऊपर से एक जैसे दिखते हैं,वही दो आंखे दो कान दो हाथ दो पैर एक दिल एक दिमाग़ लेकिन poor people की philosophy भी बिलकुल क्लियर है भाई,’’ आज क्या दोगे? दिहाड़ी क्या मिलेगी?’’ चार दिन पंद्रह दिन या चार महीने काम करते हुए हो गये टपक से बोलेंगे हमें तो चार दिन पंद्रह दिन चार महीने काम करते हुए हो गये कुछ मिला नहीं यार! poor people अमीरों की सोच के बिलकुल विपरीत समय खर्च करना नहीं चाहते long पीरियड के लिए ,इनका समय इतना ही है चार पाँच दस बीस घंटे लगवा लो जी हमसे,ये टाइम खर्च करना नहीं चाहते effort खर्च करना नहीं चाहते साल दो साल चार साल की ,ना टाइम ना effort और पैसा लगाते वक़्त तो इन्हें बाप रे बाप 1504 डिग्री का मियादी बुख़ार आ जाता है जो किसी भी दवाई से खतम ही नहीं होता,यानी पैसा लगाने का issue है इनको टाइम लगाने का issue है इनको,effort लगाने का issue है इनको! But they want to become rich! They want to become rich! बहुत simple philosophy है भाई अमीर ग़रीब की सोच का फ़र्क़ यही है इसलिए ग़रीब ग़रीब ही रहता है और अमीर और ज़्यादा अमीर होता चला जा रहा हैं,अन्त में यही कहूँगा की,
सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे,
नजर को बदलो नजारे बदल जाएंगे।
कश्तियां बदलने की कोई जरुरत नहीं मेरे दोस्त,
दिशाओं को बदलो किनारे बदल जायेंगे॥