20/03/2026
मैं जीवन में हर जगह से हारा हुआ इंसान हूँ।
कभी सोचा था कि कुछ बनूँगा,
अपना नाम होगा,
लोग पहचानेंगे...
लेकिन सच यह है कि मैं अपना ही भविष्य नहीं बना पाया।
समय निकलता गया
और मैं वहीं का वहीं खड़ा रह गया।
जब लोग अपने करियर की बात करते हैं,
अपनी कमाई, अपनी उपलब्धियाँ गिनाते हैं,
तो मैं चुप हो जाता हूँ।
मेरे पास बताने के लिए
न कोई मुकाम है,
न कोई कहानी,
सिर्फ अधूरे फैसले और टूटे हुए हौसले हैं।
मेरे पास दोस्त भी नहीं हैं।
कोई ऐसा नहीं
जिसे रात के दो बजे फोन कर सकूँ
और कह सकूँ —
"यार, मैं ठीक नहीं हूँ।"
घरवालों की आँखों में
कभी मेरे लिए उम्मीद हुआ करती थी,
आज वहाँ सिर्फ एक चुप स्वीकृति है —
जैसे उन्होंने मान लिया हो
कि यह लड़का अब कुछ नहीं कर पाएगा।
और जिस एक इंसान के सामने
मैं बिना डर के खुद बन जाता था,
जिसके सामने मुझे मजबूत बनने का नाटक नहीं करना पड़ता था,
जो मेरी कमजोरी देखकर भी मुझे छोड़कर नहीं जाती थी —
वह भी चली गई।
उसके जाने के बाद
जिंदगी रुकी नहीं,
पर जीने का मतलब खत्म हो गया।
अब दिन गुजरते हैं
पर कोई इंतज़ार नहीं होता।
रात आती है
पर नींद नहीं आती।
फोन बजता है
पर उठाने का मन नहीं करता।
इसलिए इनकमिंग बंद कर दी,
इंस्टाग्राम बंद कर दिया,
अब व्हाट्सएप और फेसबुक भी बंद कर रहा हूँ।
लोगों से दूर भाग नहीं रहा,
पर लोगों के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं बची।
कभी-कभी लगता है
मैं किसी कहानी का वो किरदार हूँ
जिसे शुरू तो किया गया था,
लेकिन बीच में ही छोड़ दिया गया।
न मैं किसी का सहारा बन पाया,
न कोई मेरा सहारा बना।
मैं थक गया हूँ
खुद को समझाते-समझाते,
खुद को संभालते-संभालते,
और यह दिखाते-दिखाते
कि सब ठीक है।
सच यह है —
कुछ भी ठीक नहीं है।
मैं हारा हुआ हूँ,
ठुकराया हुआ हूँ,
और सबसे ज्यादा
मैं खुद की नजरों में गिर चुका हूँ।
अब बस जी रहा हूँ,
क्योंकि सांस चल रही है…
वरना जीने की वजह
बहुत पहले खत्म हो चुकी है।
— स्वराज 💔😭