Swaraj Meghwal

Swaraj Meghwal थोडा डिप्रेस्ड, थोड़ा साइको, घूमना शोक है, घोर मैत्री, एकाकी 😊👍

20/06/2026

प्रियतमा,

अगर इस जीवन में तुम फिर कभी न मिली,
तो शायद मैं उसी शहर में उम्र गुज़ार दूँगा जहाँ हम बिछड़े थे।
मैं उन गलियों में शामें बिताऊँगा, जहाँ कभी तुम्हारी हँसी ठहरी होगी।
उन रास्तों पर धीरे-धीरे चलूँगा, जिन पर तुम्हारे कदमों की धूल अब भी बाकी होगी।

तुम्हारे जिए हुए लम्हों में मैं अपनी अधूरी कविताएँ लिखूँगा,
और तुम्हारी यादों को अपने भीतर ऐसे सींचूँगा जैसे कोई सूखी ज़मीन पहली बारिश को पीती है।

तुम्हें याद है?
हम अक्सर उन जगहों की बातें किया करते थे, जहाँ हम साथ जाना चाहते थे — पहाड़ों के किसी शांत मोड़ पर, समंदर के किनारे किसी लंबी ख़ामोशी में, या किसी पुराने शहर की बारिश भरी सड़कों पर।

अजीब होता है प्रेम...बंधन भी है, और सबसे बड़ी आज़ादी भी।
बेबस भी करता है, और भीतर एक अनंत आकाश भी खोल देता है।
शायद मैं उसी प्रेम का आख़िरी सिरा हूँ — थोड़ा टूटा हुआ, थोड़ा आवारा, लेकिन अब भी तुम्हारे नाम पर धड़कता हुआ।

मैं कई रातें खुली छत पर सोऊँगा, और आसमान में तुम्हें तलाश करूँगा। हवा जब चेहरे को छुएगी, तो उसे तुम्हारे हाथों का स्पर्श समझ लूँगा।
किसी पेड़ से गिरा फूल अगर पास आकर ठहरेगा, तो उसे तुम्हारे एहसास की तरह सहेजकर रख दूँगा।

मुझे मालूम है, मेरा प्रेम तुम्हें कभी-कभी बहुत फिल्मी, बहुत अतिशयोक्तिपूर्ण लगेगा, पर सच कहूँ — मैंने प्रेम को कभी आधा सीखा ही नहीं। जो महसूस किया, पूरी शिद्दत से किया।
मेरे भीतर तुम्हारे लिए एक जीवित युद्ध चलता है, जिसकी आवाज़ बाहर नहीं आती।

कई बार लगता है कि तुम्हारा ज़िक्र बहुत कर चुका हूँ, फिर अचानक ख़ामोश हो जाता हूँ....ताकि तुम्हारी दुनिया पर मेरी उदासी का बोझ न पड़े।

मैंने अपनी तकलीफ़ों को चुपचाप पीना सीख लिया है, क्योंकि तुम्हें मुस्कुराते देखना, अब भी मेरी सबसे बड़ी राहत है। दूरी से मुझे शिकायत नहीं, पर तुम्हारी वह झूठी सहानुभूति अब मर चुकी है,
जो कभी मुझे ज़िंदा रखती थी।

अब तुम मेरे जीवन में नहीं हो, सिर्फ़ मेरे विचारों में हो। तुम मेरी सोच हो, मेरी परिधि हो, मेरे भीतर बची हुई कोमलता का आख़िरी प्रमाण हो — लेकिन तुम अब मेरा सम्पूर्ण संसार नहीं हो।
और शायद प्रेम का सबसे कठिन रूप यही होता है — जब इंसान अपने ही बनाए मंदिर से अपनी सबसे प्रिय मूर्ति को विदा करता है।
तुम्हें जाना होगा। उन यादों को भी जाना होगा, जिन्होंने तुम्हें मेरे भीतर देवी बनाकर रखा हुआ है।
तुम मेरी इबादत थीं, लेकिन अब मुझे खुद को भी बचाना है।
इसलिए.....अब धीरे-धीरे तुम्हें लिखना बंद कर दूँगा।

तुम्हारे नाम लिखे गए ख़तों का यह आख़िरी सिलसिला होगा।

और यक़ीन मानो, कुछ प्रेम कहानियाँ खत्म नहीं होतीं — बस एक दिन लिखी जाना बंद हो जाती हैं।

— स्वराज 💔

24/05/2026

प्रियतमा,

यदि तुम दुःखी हो,
तो शायद मैं तुम्हें दुनिया का सबसे क़रीबी इंसान लगूँगा।
मेरी बातें तुम्हारे भीतर उतरेंगी,
मेरी ख़ामोशियाँ तुम्हें समझ आएँगी,
और तुम्हें लगेगा कि इस भीड़ भरी दुनिया में
कोई है जो बिना कहे तुम्हारा दर्द पढ़ लेता है।

लेकिन जिस दिन तुम सचमुच खुश होगी,
उस दिन शायद मैं तुम्हें बोझ लगने लगूँगा।
मेरी गंभीर बातें तुम्हें नकारात्मक लगेंगी,
मेरी गहराई तुम्हें थका देगी,
और मैं वही “फ़ालतू आदमी” बन जाऊँगा
जो हर बात को दिल से लगा लेता है।

मुझे इससे शिकायत नहीं है।
क्योंकि मैंने हमेशा खुद को
खुशियों का नहीं,
दुःख का साथी माना है।

मैं उन लोगों में से नहीं हूँ
जो सिर्फ़ हँसी में साथ खड़े हों।
मैं वो आदमी हूँ
जो तुम्हारे सबसे बुरे दिनों में
तुम्हारे कमरे की ख़ामोशी बनकर बैठ सकता है।
जो तुम्हारे रोने पर सलाह नहीं देगा,
बस तुम्हारे बिखरने को अपने कंधों पर उठा लेगा।

इसलिए,
जब कभी जीवन तुम्हें भीतर से तोड़ने लगे,
जब तुम्हारी मुस्कान सिर्फ़ एक अभिनय रह जाए,
जब रातें तुम्हें सोने न दें,
और जब तुम्हें लगे कि अब कोई नहीं समझेगा —
तब मेरे पास आना।

मैं वादा करता हूँ,
तुम्हें टूटने नहीं दूँगा।
तुम्हारे हाथ नहीं छोड़ूँगा।
तुम्हारे भीतर बची हुई आख़िरी रोशनी को भी
मरने नहीं दूँगा।

लेकिन जब तुम्हारी दुनिया फिर से रंगों से भर जाए,
जब तुम्हें किसी हल्के, आसान, चमकदार प्रेम की ज़रूरत हो,
तो मेरे पास मत रुकना।

मैं बारिश के बाद की मिट्टी हूँ,
भीगी हुई, भारी, और सच्ची।
मैं उत्सवों का आदमी नहीं हूँ।
मैं उन लोगों के लिए बना हूँ
जो भीतर से चुपचाप टूट रहे होते हैं।

इसलिए खुशियों का साथी
तुम कहीं और ढूँढ लेना।
मैं तो बस
दुःख में याद आने वाला इंसान हूँ।

20/03/2026

मैं जीवन में हर जगह से हारा हुआ इंसान हूँ।
कभी सोचा था कि कुछ बनूँगा,
अपना नाम होगा,
लोग पहचानेंगे...
लेकिन सच यह है कि मैं अपना ही भविष्य नहीं बना पाया।
समय निकलता गया
और मैं वहीं का वहीं खड़ा रह गया।

जब लोग अपने करियर की बात करते हैं,
अपनी कमाई, अपनी उपलब्धियाँ गिनाते हैं,
तो मैं चुप हो जाता हूँ।
मेरे पास बताने के लिए
न कोई मुकाम है,
न कोई कहानी,
सिर्फ अधूरे फैसले और टूटे हुए हौसले हैं।

मेरे पास दोस्त भी नहीं हैं।
कोई ऐसा नहीं
जिसे रात के दो बजे फोन कर सकूँ
और कह सकूँ —
"यार, मैं ठीक नहीं हूँ।"

घरवालों की आँखों में
कभी मेरे लिए उम्मीद हुआ करती थी,
आज वहाँ सिर्फ एक चुप स्वीकृति है —
जैसे उन्होंने मान लिया हो
कि यह लड़का अब कुछ नहीं कर पाएगा।

और जिस एक इंसान के सामने
मैं बिना डर के खुद बन जाता था,
जिसके सामने मुझे मजबूत बनने का नाटक नहीं करना पड़ता था,
जो मेरी कमजोरी देखकर भी मुझे छोड़कर नहीं जाती थी —
वह भी चली गई।

उसके जाने के बाद
जिंदगी रुकी नहीं,
पर जीने का मतलब खत्म हो गया।

अब दिन गुजरते हैं
पर कोई इंतज़ार नहीं होता।
रात आती है
पर नींद नहीं आती।
फोन बजता है
पर उठाने का मन नहीं करता।

इसलिए इनकमिंग बंद कर दी,
इंस्टाग्राम बंद कर दिया,
अब व्हाट्सएप और फेसबुक भी बंद कर रहा हूँ।

लोगों से दूर भाग नहीं रहा,
पर लोगों के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं बची।

कभी-कभी लगता है
मैं किसी कहानी का वो किरदार हूँ
जिसे शुरू तो किया गया था,
लेकिन बीच में ही छोड़ दिया गया।

न मैं किसी का सहारा बन पाया,
न कोई मेरा सहारा बना।

मैं थक गया हूँ
खुद को समझाते-समझाते,
खुद को संभालते-संभालते,
और यह दिखाते-दिखाते
कि सब ठीक है।

सच यह है —
कुछ भी ठीक नहीं है।

मैं हारा हुआ हूँ,
ठुकराया हुआ हूँ,
और सबसे ज्यादा
मैं खुद की नजरों में गिर चुका हूँ।

अब बस जी रहा हूँ,
क्योंकि सांस चल रही है…
वरना जीने की वजह
बहुत पहले खत्म हो चुकी है।

— स्वराज 💔😭

16/03/2026

सुनो,

आज जब तुम्हारा ब्लॉक किया हुआ नाम स्क्रीन पर देखा,
तो पहली बार सच में समझ आया कि
खामोशी भी कितनी जोर से चोट मारती है।
तुमने कुछ कहा नहीं,
कोई शिकायत नहीं की,
कोई आख़िरी बात भी नहीं…
बस एक बटन दबाया
और मैं तुम्हारी दुनिया से बाहर हो गया।

अजीब बात है,
लोग कहते हैं कि रिश्ते धीरे-धीरे खत्म होते हैं,
पर हमारे बीच तो जैसे एक पल में सब खत्म हो गया।
इतने साल, इतनी बातें, इतने वादे…
सब एक “ब्लॉक” शब्द के पीछे छुप गए।

मैं मानता हूँ,
शायद मुझसे गलतियां हुई होंगी,
शायद मैं तुम्हें वो सुकून नहीं दे पाया
जिसकी तुम्हें जरूरत थी।
लेकिन इतना जरूर जान लो,
मैंने तुम्हें कभी हल्के में नहीं लिया।
तुम मेरे लिए आदत नहीं थी,
तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा थी।

आज फोन हाथ में लेकर
बार-बार वही चैट खोलने की कोशिश करता हूँ
जो अब खुलती ही नहीं।
उँगलियाँ वही नाम लिखती हैं,
पर सामने सिर्फ खालीपन आता है।

तुम्हें शायद सुकून मिल गया होगा
मुझसे दूर होकर,
लेकिन यहाँ एक इंसान है
जिसकी दिनचर्या से लेकर
सपनों तक में तुम शामिल थी।

तुम्हें खोने का दर्द
चिल्लाता नहीं है,
बस अंदर ही अंदर
सब कुछ तोड़ता रहता है।

मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं,
न कोई सवाल करूंगा,
न कोई सफाई मांगूंगा।
क्योंकि जो जाना चाहता है
उसे रोका नहीं जाता।

बस इतना याद रखना,
कभी अगर जिंदगी के किसी मोड़ पर
तुम्हें यह लगे
कि कोई था
जो तुम्हें बिना शर्त चाहता था,
जो तुम्हारी हर बात पर यकीन करता था,
जो तुम्हारे गुस्से में भी तुम्हें ही ढूंढता था…

तो समझ लेना
वह मैं ही था।

अब तुम अपनी दुनिया में खुश रहो,
मैं कोशिश करूँगा
तुम्हारी यादों के साथ जीने की।

तुम्हें खोकर
मैंने किसी और को नहीं खोया,
मैंने खुद का एक हिस्सा खो दिया है।

— तुम्हारा कभी था,
अब सिर्फ यादों में रहने वाला...!!

— स्वराज 💔

Address

Dhanau
Barmer
344702

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Swaraj Meghwal posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Swaraj Meghwal:

Shortcuts

Share