Swaraj Meghwal

Swaraj Meghwal थोडा डिप्रेस्ड, थोड़ा साइको, घूमना शोक है, घोर मैत्री, एकाकी 😊👍

20/03/2026

मैं जीवन में हर जगह से हारा हुआ इंसान हूँ।
कभी सोचा था कि कुछ बनूँगा,
अपना नाम होगा,
लोग पहचानेंगे...
लेकिन सच यह है कि मैं अपना ही भविष्य नहीं बना पाया।
समय निकलता गया
और मैं वहीं का वहीं खड़ा रह गया।

जब लोग अपने करियर की बात करते हैं,
अपनी कमाई, अपनी उपलब्धियाँ गिनाते हैं,
तो मैं चुप हो जाता हूँ।
मेरे पास बताने के लिए
न कोई मुकाम है,
न कोई कहानी,
सिर्फ अधूरे फैसले और टूटे हुए हौसले हैं।

मेरे पास दोस्त भी नहीं हैं।
कोई ऐसा नहीं
जिसे रात के दो बजे फोन कर सकूँ
और कह सकूँ —
"यार, मैं ठीक नहीं हूँ।"

घरवालों की आँखों में
कभी मेरे लिए उम्मीद हुआ करती थी,
आज वहाँ सिर्फ एक चुप स्वीकृति है —
जैसे उन्होंने मान लिया हो
कि यह लड़का अब कुछ नहीं कर पाएगा।

और जिस एक इंसान के सामने
मैं बिना डर के खुद बन जाता था,
जिसके सामने मुझे मजबूत बनने का नाटक नहीं करना पड़ता था,
जो मेरी कमजोरी देखकर भी मुझे छोड़कर नहीं जाती थी —
वह भी चली गई।

उसके जाने के बाद
जिंदगी रुकी नहीं,
पर जीने का मतलब खत्म हो गया।

अब दिन गुजरते हैं
पर कोई इंतज़ार नहीं होता।
रात आती है
पर नींद नहीं आती।
फोन बजता है
पर उठाने का मन नहीं करता।

इसलिए इनकमिंग बंद कर दी,
इंस्टाग्राम बंद कर दिया,
अब व्हाट्सएप और फेसबुक भी बंद कर रहा हूँ।

लोगों से दूर भाग नहीं रहा,
पर लोगों के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं बची।

कभी-कभी लगता है
मैं किसी कहानी का वो किरदार हूँ
जिसे शुरू तो किया गया था,
लेकिन बीच में ही छोड़ दिया गया।

न मैं किसी का सहारा बन पाया,
न कोई मेरा सहारा बना।

मैं थक गया हूँ
खुद को समझाते-समझाते,
खुद को संभालते-संभालते,
और यह दिखाते-दिखाते
कि सब ठीक है।

सच यह है —
कुछ भी ठीक नहीं है।

मैं हारा हुआ हूँ,
ठुकराया हुआ हूँ,
और सबसे ज्यादा
मैं खुद की नजरों में गिर चुका हूँ।

अब बस जी रहा हूँ,
क्योंकि सांस चल रही है…
वरना जीने की वजह
बहुत पहले खत्म हो चुकी है।

— स्वराज 💔😭

16/03/2026

सुनो,

आज जब तुम्हारा ब्लॉक किया हुआ नाम स्क्रीन पर देखा,
तो पहली बार सच में समझ आया कि
खामोशी भी कितनी जोर से चोट मारती है।
तुमने कुछ कहा नहीं,
कोई शिकायत नहीं की,
कोई आख़िरी बात भी नहीं…
बस एक बटन दबाया
और मैं तुम्हारी दुनिया से बाहर हो गया।

अजीब बात है,
लोग कहते हैं कि रिश्ते धीरे-धीरे खत्म होते हैं,
पर हमारे बीच तो जैसे एक पल में सब खत्म हो गया।
इतने साल, इतनी बातें, इतने वादे…
सब एक “ब्लॉक” शब्द के पीछे छुप गए।

मैं मानता हूँ,
शायद मुझसे गलतियां हुई होंगी,
शायद मैं तुम्हें वो सुकून नहीं दे पाया
जिसकी तुम्हें जरूरत थी।
लेकिन इतना जरूर जान लो,
मैंने तुम्हें कभी हल्के में नहीं लिया।
तुम मेरे लिए आदत नहीं थी,
तुम मेरी जिंदगी का हिस्सा थी।

आज फोन हाथ में लेकर
बार-बार वही चैट खोलने की कोशिश करता हूँ
जो अब खुलती ही नहीं।
उँगलियाँ वही नाम लिखती हैं,
पर सामने सिर्फ खालीपन आता है।

तुम्हें शायद सुकून मिल गया होगा
मुझसे दूर होकर,
लेकिन यहाँ एक इंसान है
जिसकी दिनचर्या से लेकर
सपनों तक में तुम शामिल थी।

तुम्हें खोने का दर्द
चिल्लाता नहीं है,
बस अंदर ही अंदर
सब कुछ तोड़ता रहता है।

मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं,
न कोई सवाल करूंगा,
न कोई सफाई मांगूंगा।
क्योंकि जो जाना चाहता है
उसे रोका नहीं जाता।

बस इतना याद रखना,
कभी अगर जिंदगी के किसी मोड़ पर
तुम्हें यह लगे
कि कोई था
जो तुम्हें बिना शर्त चाहता था,
जो तुम्हारी हर बात पर यकीन करता था,
जो तुम्हारे गुस्से में भी तुम्हें ही ढूंढता था…

तो समझ लेना
वह मैं ही था।

अब तुम अपनी दुनिया में खुश रहो,
मैं कोशिश करूँगा
तुम्हारी यादों के साथ जीने की।

तुम्हें खोकर
मैंने किसी और को नहीं खोया,
मैंने खुद का एक हिस्सा खो दिया है।

— तुम्हारा कभी था,
अब सिर्फ यादों में रहने वाला...!!

— स्वराज 💔

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