The Vanik Insurance & Financial Services

The Vanik Insurance & Financial Services Health Insurance, General and Life Insurance Service providers and consolidators across segments.

क्या आपके पास टर्म प्लान और मेडिक्लेम दोनों हैं? फिर भी एक्सीडेंट के बाद 6 महीने काम बंद रहने पर घर का खर्च कैसे चलेगा? ...
29/08/2026

क्या आपके पास टर्म प्लान और मेडिक्लेम दोनों हैं? फिर भी एक्सीडेंट के बाद 6 महीने काम बंद रहने पर घर का खर्च कैसे चलेगा? जानिए उस ₹500 के कवर का सच जो आपकी 'आय' (Income) को सुरक्षित रखता है! 🚗⚠️💼

भारत में हर 1 मिनट में एक बड़ा सड़क हादसा होता है। दुर्घटना के बाद 3 स्थितियाँ बनती हैं:

1: अस्पताल का इलाज: यह खर्च आपका Health Insurance उठाता है।
2: दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु: इसका क्लेम आपके परिवार को Term Insurance से मिलता है।
3: विकलांगता और काम बंद होना (Disability & Income Loss): यदि दुर्घटना में हाथ, पैर या आँखों का नुकसान हो जाए और व्यक्ति काम करने में असमर्थ हो जाए, तो यहाँ Personal Accident Insurance काम आता है।

यह पॉलिसी केवल मृत्यु ही नहीं, बल्कि:

1: Permanent Total Disability (PTD): 100% सम इंश्योर्ड नकद देती है।
2: Permanent Partial Disability (PPD): निर्धारित प्रतिशत के अनुसार एकमुश्त राशि देती है।
3: Temporary Total Disability (TTD): जब तक काम बंद है, तब तक हर हफ्ते निश्चित वीकली अलाउंस (Income Replacement) देती है!

Real-life Relevance
अमित जी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। एक बाइक एक्सीडेंट में उनके हाथ की हड्डियों में गंभीर फैक्चर आया और डॉक्टर ने उन्हें 5 महीने तक पूर्ण बेड-रेस्ट की सलाह दी। अस्पताल का बिल ₹1.5 लाख मेडिक्लेम से पास हो गया। लेकिन इन 5 महीनों के दौरान बिना सैलरी के घर की ईएमआई, बच्चों की फीस और राशन का खर्च चलाना असंभव हो गया। यदि उनके पास ₹20 लाख का पर्सनल एक्सीडेंट प्लान होता, तो उन्हें हर हफ्ते ₹10,000 से ₹15,000 का वीकली पे-आउट (TTD Benefit) मिलता और घर का खर्च आसानी से चलता।

Practical Takeaway
1: सालाना मामूली प्रीमियम: ₹10 लाख से ₹25 लाख का पर्सनल एक्सीडेंट कवर केवल ₹1,000 से ₹2,000 प्रति वर्ष में मिल जाता है।
2: इनकम के हिसाब से चुनें: अपनी सालाना आय का कम से कम 5 से 10 गुना तक पर्सनल एक्सीडेंट सम इंश्योर्ड जरूर रखें।
3: वीकली अलाउंस क्लॉज चेक करें: पॉलिसी में देख लें कि 'Temporary Total Disability (TTD)' का साप्ताहिक भुगतान शामिल है या नहीं।

क्या आपकी वित्तीय सुरक्षा नीति में 'विकलांगता और आय सुरक्षा चक्र' शामिल है? अपनी पॉलिसी की व्यापक समीक्षा के लिए आज ही The Vanik से संपर्क करें। 🤝

28/08/2026

नमस्ते! मैं हूँ Vanya, The Vanik Insurance की ओर से। 🌸

रक्षाबंधन सिर्फ़ राखी बाँधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्यार, विश्वास, अपनापन और एक-दूसरे की सुरक्षा के वादे का पवित्र पर्व है। 🤝❤️

इस खूबसूरत अवसर पर आइए, हम अपने भाई-बहनों और पूरे परिवार के साथ खुशियों के इन अनमोल पलों को और भी खास बनाएं।

The Vanik Insurance परिवार की ओर से आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎊

आपका हर रिश्ता बना रहे मजबूत, हर चेहरा मुस्कुराता रहे, और आपके अपनों की खुशियाँ हमेशा सुरक्षित रहें। 🛡️✨

शुभ रक्षाबंधन! 🌺🎀
सही किया, बीमा लिया।
The Vanik Insurance — The Assurance Behind Your Insurance.

#रक्षाबंधन #त्योहार #खुशियां

अपनी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से परेशान हैं? पुरानी पॉलिसी बंद करने की गलती मत करना—वरना सालों का कमाया वेटिंग पीरियड और N...
26/08/2026

अपनी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से परेशान हैं? पुरानी पॉलिसी बंद करने की गलती मत करना—वरना सालों का कमाया वेटिंग पीरियड और NCB बोनस 1 सेकंड में खत्म हो जाएगा! 🏥🔄❌

Education/Knowledge

IRDAI के नियमों के अनुसार, मोबाइल नंबर की तरह आप अपने Health Insurance को भी एक कंपनी से दूसरी कंपनी में आसानी से पोर्ट (Port) करा सकते हैं।

पोर्टेबिलिटी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी पुरानी पॉलिसी में जितने साल का Waiting Period खत्म हो चुका है (जैसे प्री-एक्जिस्टिंग डिजीज का 3 साल का कवर), वह समय नई पॉलिसी में भी लागू रहता है। यानी आपको नई कंपनी में नए सिरे से 3 साल का इंतजार नहीं करना पड़ता!

इसके अलावा, पुरानी पॉलिसी का संचित नो क्लेम बोनस (NCB) भी आपकी नई पॉलिसी के सम इंश्योर्ड (Sum Insured) में जोड़ दिया जाता है।

Real-life Relevance
राकेश जी पिछले 4 सालों से एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चला रहे थे और उनका डायबिटीज का वेटिंग पीरियड पूरा हो चुका था। कंपनी की सर्विस से परेशान होकर उन्होंने पुरानी पॉलिसी लैप्स होने दी और एक नई कंपनी से बिल्कुल नया प्लान ले लिया। 3 महीने बाद जब वे डायबिटीज के इलाज के लिए एडमिट हुए, तो नई कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया क्योंकि नए प्लान में 3 साल का PED वेटिंग पीरियड फिर से लागू हो गया था! यदि वे पॉलिसी पोर्ट कराते, तो उनका क्लेम तुरंत पास हो जाता।

Practical Takeaway
45 दिन पहले अप्लाई करें: पोर्टेबिलिटी की रिक्वेस्ट हमेशा अपनी मौजूदा पॉलिसी के रिन्यूअल डेट से कम से कम 45 से 60 दिन पहले सबमिट करें।

कंटीन्यूटी बेनेफिट (Continuity Benefit) चेक करें: पोर्टिंग फॉर्म में अपनी पुरानी पॉलिसी की कॉपी और पिछले क्लेम रिकॉर्ड्स सही-सही अटैच करें।

पॉलिसी लैप्स न होने दें: पोर्टिंग प्रोसेस के दौरान अपनी पुरानी पॉलिसी की एक्सपायरी डेट का ध्यान रखें।

क्या आपकी मौजूदा हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत बढ़ गया है या क्लेम सर्विस से असंतुष्ट हैं? अपनी पॉलिसी को बिना किसी नुकसान के सही समय पर पोर्ट कराने के लिए आज ही The Vanik से सलाह लें। 🤝

25/08/2026

Quick Insurance Tip 💡

​कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस केवल जॉब रहने तक ही आपका साथ देता है! 💼🏥

​नौकरी बदलते ही या रिटायरमेंट के बाद बिना पर्सनल कवर के रहना बड़ा जोखिम है।

​यंग और फिट रहते हुए ही अपना Personal Health Insurance जरूर लें!

​अपनी फैमिली का हेल्थ रिस्क ऑडिट कराने के लिए आज ही The Vanik से पूछें! 🛡️✨

कंपनी ₹10 लाख का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है? बहुत बढ़िया! लेकिन क्या आप जानते हैं कि जॉब बदलते ही या 60 की उम्र में...
25/08/2026

कंपनी ₹10 लाख का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है? बहुत बढ़िया! लेकिन क्या आप जानते हैं कि जॉब बदलते ही या 60 की उम्र में रिटायर होते ही यह सुरक्षा कवच 1 सेकंड में गायब हो जाता है? 💼❌🏥

कॉर्पोरेट ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस (Corporate GMC) एक बेहतरीन एम्प्लॉई बेनिफिट है, लेकिन इसे अपने परिवार की एकमात्र सुरक्षा मानना एक बहुत बड़ी भूल है।

​1. कॉर्पोरेट इंश्योरेंस की सीमाएँ: यह केवल तब तक एक्टिव रहता है जब तक आप उस कंपनी के कर्मचारी हैं। नौकरी छोड़ते ही, ले-ऑफ (Layoff) होने पर या रिटायरमेंट के दिन यह पॉलिसी तुरंत समाप्त हो जाती है।

​2. पर्सनल मेडिक्लेम का फायदा: एक व्यक्तिगत या फैमिली फ्लोटर हेल्थ पॉलिसी आपकी पूरी जिंदगी (Lifetime Renewable) आपके साथ रहती है, चाहे आप नौकरी बदलें, बिजनेस करें या रिटायर हो जाएं।

​यदि आप 50 की उम्र में रिटायरमेंट के बाद नया पर्सनल प्लान लेने जाएंगे, तो डायबिटीज या बीपी जैसी बीमारियों के कारण या तो पॉलिसी खारिज हो जाएगी या 4 साल का लंबा वेटिंग पीरियड लग जाएगा।

​Real-life Relevance

​विक्रम जी (उम्र 48 वर्ष) एक आईटी कंपनी में सीनियर मैनेजर थे। कंपनी से ₹8 लाख का कवर था, इसलिए उन्होंने कोई पर्सनल पॉलिसी नहीं ली। 45 की उम्र में उन्हें हाई बीपी और डायबिटीज हो गया। अचानक 48 की उम्र में कंपनी में रीस्ट्रक्चरिंग के कारण उनकी जॉब चली गई। जब वे नई पर्सनल पॉलिसी लेने गए, तो इंश्योरेंस कंपनी ने उनकी पुरानी बीमारियों (PED) के कारण भारी प्रीमियम और 3 साल का वेटिंग पीरियड लगा दिया। बिना जॉब और बिना हेल्थ कवर के 6 महीने उनके परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण रहे।

Takeaway

​शुरुआत से ही पर्सनल कवर रखें: यंग और फिट रहते हुए ही अपनी अलग से कम से कम ₹10 लाख से ₹25 लाख की Personal Health Insurance Policy जरूर लें।

​नो क्लेम बोनस (NCB) कमाएं: जब तक आप जॉब में हैं, छोटे-मोटे दावों के लिए कंपनी की पॉलिसी का इस्तेमाल करें और अपनी पर्सनल पॉलिसी में NCB बोनस (जो सम इंश्योर्ड को 100% तक बढ़ा देता है) जमा होने दें।

​पोर्टेबिलिटी (Portability) नियम समझें: यदि आप कंपनी पॉलिसी छोड़ रहे हैं, तो IRDAI नियमों के तहत उसे रिन्यूअल से 45 दिन पहले पर्सनल पॉलिसी में पोर्ट कराने का विकल्प भी तलाश सकते हैं।

क्या आपके पास कंपनी के कवर के अलावा खुद का पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस है? अपनी पारिवारिक स्वास्थ्य सुरक्षा का फ्री रिस्क ऑडिट कराने के लिए आज ही The Vanik से संपर्क करें। 🤝

₹10 लाख का मेडिक्लेम होने के बावजूद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में परिवार का जमा-पूंजी क्यों खत्म हो जाती है? जानिए उस बड़े...
24/08/2026

₹10 लाख का मेडिक्लेम होने के बावजूद कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में परिवार का जमा-पूंजी क्यों खत्म हो जाती है? जानिए उस बड़े वित्तीय गैप को जो केवल 'क्रिटिकल इलनेस कवर' भर सकता है! 🏥💔💰

​सामान्य स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) और क्रिटिकल इलनेस कवर (Critical Illness Cover) के बीच का अंतर समझना हर परिवार के लिए बेहद जरूरी है:

​रेगुलर मेडिक्लेम (Indemnity Cover): यह केवल अस्पताल के कमरों, डॉक्टरों और सर्जरी के वास्तविक बिलों का भुगतान करता है। यदि अस्पताल का बिल ₹3 लाख आया, तो बीमा कंपनी ₹3 लाख ही देगी।

​क्रिटिकल इलनेस कवर (Benefit/Lump-sum Cover): जैसे ही किसी गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, स्ट्रोक, या मेजर ऑर्गन ट्रांसप्लांट) का डायग्नोसिस (Diagnosis) कन्फर्म होता है, बीमा कंपनी पूरी सम इंश्योर्ड राशि (जैसे ₹25 लाख) का एकमुश्त कैश चेक मरीज के हाथ में थमा देती है—बिना यह पूछे कि अस्पताल का बिल कितना आया!

Real-life Relevance

​अमित जी को हार्ट अटैक आया और बाइपास सर्जरी हुई। अस्पताल का बिल ₹4 लाख बना जो उनके रेगुलर मेडिक्लेम से पास हो गया। लेकिन डॉक्टर ने उन्हें 1 साल तक बेड रेस्ट की सलाह दी। 1 साल तक काम बंद होने से घर की ईएमआई, बच्चों की फीस और दवाओं का ₹8,000/महीने का खर्च चलाने में उनकी सारी सेविंग्स खत्म हो गई। यदि उनके पास ₹20 लाख का क्रिटिकल इलनेस राइडर होता, तो 1 साल का पारिवारिक वित्तीय संकट तुरंत दूर हो जाता।

​Practical Takeaway

​लाइफस्टाइल बीमारियाँ बढ़ रही हैं: 30 साल की उम्र पार करते ही अपनी बेस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में Critical Illness Add-on / Rider जरूर जुड़वाएं।

​एकमुश्त राशि का इस्तेमाल: इस एकमुश्त पैसे का उपयोग आप भारत से बाहर इलाज कराने, घरेलू खर्च चलाने, लोन चुकाने या वैकल्पिक उपचार के लिए बेफिक्र होकर कर सकते हैं।

​कम प्रीमियम में बड़ा सुरक्षा चक्र: राइडर के रूप में यह कवर बेहद मामूली अतिरिक्त प्रीमियम पर मिल जाता है।

क्या आपकी मौजूदा हेल्थ पॉलिसी में गंभीर बीमारियों के लिए लम्प-सम (Lump-sum) कैश कवर शामिल है? अपनी पॉलिसी की समीक्षा और सही राइडर गाइडेंस के लिए आज ही The Vanik से संपर्क करें। 🤝

अस्पताल के TPA डेस्क ने 'Cashless Request Denied' का पेपर थमा दिया? घबराइए मत! इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बीमा कंपन...
22/08/2026

अस्पताल के TPA डेस्क ने 'Cashless Request Denied' का पेपर थमा दिया? घबराइए मत! इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बीमा कंपनी ने आपका क्लेम खारिज कर दिया है! 🏥📄⚠️

अस्पताल में भर्ती होते ही जब बीमा कंपनी 'Cashless Pre-Authorization' खारिज करती है, तो मरीज के घरवाले पैनिक हो जाते हैं। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा प्रशासनिक अंतर समझना जरूरी है:

​1. कैशलेस सुविधा की मनाही (Cashless Denial): इसका मतलब केवल यह है कि शुरुआती 24 से 48 घंटों में बीमा कंपनी को पर्याप्त मेडिकल दस्तावेज या बीमारी की पुरानी हिस्ट्री (Past Medical History) स्पष्ट नहीं मिल पाई है। इसलिए कंपनी बिना पूरे कागजात देखे तुरंत कैशलेस अप्रूवल नहीं दे सकती।

​2. क्लेम का रिजेक्शन (Claim Denial): यह डिस्चार्ज के बाद सभी ओरिजिनल फाइलों की जांच के बाद होता है।

​यदि आपका कैशलेस रिजेक्ट हुआ है, तो भी आप इलाज पूरा होने के बाद डिस्चार्ज समरी, टेस्ट रिपोर्ट और बिल जमा करके 100% रीइम्बर्समेंट क्लेम (Reimbursement Claim) पा सकते हैं!

Real-life Relevance/Example

सुनील जी के भाई को पेट में तेज दर्द के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। इमरजेंसी में TPA ने कैशलेस अप्रूवल के लिए भेजा, लेकिन पुरानी मेडिकल हिस्ट्री स्पष्ट न होने के कारण कैशलेस रिजेक्ट हो गया। सुनील जी को लगा कि इंश्योरेंस कंपनी ने धोखा दे दिया और उन्होंने गुस्से में बिल भरकर कागजात ही फाड़ दिए। यदि वे डिस्चार्ज के बाद वे ही कागजात TPA को रीइम्बर्समेंट के लिए भेजते, तो उनका पूरा ₹1.2 लाख का बिल पास हो जाता!

​Practical Takeaway

​पैनिक न करें: कैशलेस मना होने पर अस्पताल का बिल खुद चुकाएं, लेकिन हर एक ओरिजिनल बिल, टेस्ट रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी संभालकर रखें।

​कारण जानें: Denial Letter में लिखा कारण पढ़ें। यदि उसमें "Need more medical documents for processing" लिखा है, तो यह रीइम्बर्समेंट में 100% क्लेम योग्य है।

​रीइम्बर्समेंट फाइल करें: डिस्चार्ज मिलने के 15 से 30 दिनों के भीतर ओरिजिनल पेपर्स के साथ रीइम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म भरें।

क्या कभी अस्पताल में आपका कैशलेस अप्रूवल अटका है? अगर ऐसी स्थिति में मदद चाहिए या क्लेम रीइम्बर्समेंट फाइल करना है, तो The Vanik टीम से मार्गदर्शन लें। 🤝

नई हेल्थ पॉलिसी लेते ही अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो क्या पूरा क्लेम मिलेगा? जवाब है: 'हाँ' भी और 'ना' भी! जानिए हेल्...
19/08/2026

नई हेल्थ पॉलिसी लेते ही अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो क्या पूरा क्लेम मिलेगा? जवाब है: 'हाँ' भी और 'ना' भी! जानिए हेल्थ इंश्योरेंस के उन 3 वेटिंग पीरियड्स के बारे में जो क्लेम पास या रिजेक्ट होना तय करते हैं। 🏥⏳

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते ही पहले दिन से सब कुछ कवर नहीं होता। बीमा कंपनियाँ सुरक्षा देने से पहले एक निश्चित समय सीमा तय करती हैं, जिसे Waiting Period कहा जाता है।

इसे आसान शब्दों में 3 हिस्सों में समझें:

इन्शियल वेटिंग पीरियड (30 Days): पॉलिसी शुरू होने के पहले 30 दिनों तक किसी भी बीमारी का इलाज कवर नहीं होता (केवल एक्सीडेंटल इमरजेंसी को छोड़कर)।

स्पेसिफिक डिसीज वेटिंग पीरियड (2 Years): मोतियाबिंद (Cataract), गुर्दे की पथरी (Kidney Stone), हर्निया, जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी धीमी गति से बढ़ने वाली बीमारियों के लिए 24 महीने का इंतजार करना अनिवार्य होता है।

प्री-एक्जिस्टिंग डिसीज (PED - 2 to 4 Years): पॉलिसी लेने से पहले से मौजूद बीमारियाँ (जैसे डायबिटीज, बीपी या थायराइड) 2 से 4 साल के निरंतर कवर के बाद ही क्लेम योग्य होती हैं।

Real-life Relevance/example
अमित जी ने जनवरी में नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली। मार्च में उन्होंने मोतियाबिंद (Cataract) का ऑपरेशन करवाया और ₹45,000 का क्लेम भेजा। बीमा कंपनी ने क्लेम तुरंत खारिज कर दिया क्योंकि मोतियाबिंद पर 2 साल का 'Specific Illness Waiting Period' लागू होता था। सही जानकारी न होने के कारण अमित जी को लगा कि पॉलिसी बेकार है।

Practical Takeaway
इंतजार न करें: जब आप पूरी तरह स्वस्थ हों, तभी कम उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस ले लें ताकि सभी वेटिंग पीरियड्स समय रहते खत्म हो जाएं।

मेडिकल हिस्ट्री कभी न छिपाएं: पॉलिसी लेते समय पुरानी बीमारियों (PED) की सही जानकारी दें। 3 साल बाद वे बीमारियाँ पूरी तरह कवर हो जाएंगी।

कंटीन्यूटी का लाभ लें: जब भी पॉलिसी पोर्ट (Port) कराएं, तो पुरानी पॉलिसी का वेटिंग पीरियड क्रेडिट नई पॉलिसी में ट्रांसफर करवाना न भूलें।

क्या आपकी पॉलिसी में पुरानी बीमारियों का वेटिंग पीरियड खत्म हो चुका है? अपनी पॉलिसी की वेटिंग पीरियड शर्तें समझने के लिए आज ही The Vanik से सलाह लें। 🤝

18/08/2026

Quick Insurance Tip 💡

क्या आपकी हेल्थ पॉलिसी में Co-payment है? 🏥⚠️

अगर पॉलिसी में 20% Co-pay है, तो ₹5 लाख के बिल में से ₹1 लाख रुपये बीमा कंपनी नहीं, बल्कि आपको अपनी जेब से देने होंगे!

कम प्रीमियम के चक्कर में Co-pay न चुनें।

अपनी पॉलिसी का सही अर्थ समझें। परामर्श के लिए आज ही The Vanik से पूछें! 🛡️✨

प्रीमियम में 20% की छूट देखकर खुश होने से पहले रुकिए! जानिए हेल्थ इंश्योरेंस का वो 'Co-pay' क्लॉज, जो ₹5 लाख के अस्पताल ...
18/08/2026

प्रीमियम में 20% की छूट देखकर खुश होने से पहले रुकिए! जानिए हेल्थ इंश्योरेंस का वो 'Co-pay' क्लॉज, जो ₹5 लाख के अस्पताल बिल पर सीधे ₹1 लाख की चपत लगा सकता है! 🏥💸

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदते समय अक्सर लोग केवल कम प्रीमियम (Low Premium) देखकर खुश हो जाते हैं। लेकिन पॉलिसी डॉक्यूमेंट के छोटे अक्षरों में छिपा होता है—Co-payment (को-पेमेंट) क्लॉज।

'Co-pay' का सीधा सा मतलब है कि इलाज के दौरान बनने वाले कुल मेडिकल बिल का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 10%, 20% या 30%) बीमा कंपनी नहीं देगी, बल्कि आपको अपनी जेब से चुकाना होगा।

यह कोई डिडक्टिबल नहीं है जिसे एक बार देना हो; यह आपके हर एक क्लेम बिल पर लागू होता है, चाहे आपका सम इंश्योर कितना भी बड़ा क्यों न हो।

Real-life Relevance/Example

शर्मा जी ने ₹5 लाख का हेल्थ कवर लिया, जिसमें 20% Co-pay क्लॉज था। अचानक एक मेडिकल इमरजेंसी के कारण अस्पताल का कुल बिल ₹4 लाख बना। शर्मा जी को लगा कि पॉलिसी ₹5 लाख की है, तो पूरा बिल कैशलेस हो जाएगा।

लेकिन 20% Co-pay नियम के कारण बीमा कंपनी ने केवल ₹3.20 लाख चुकाए और बाकी के ₹80,000 शर्मा जी को अस्पताल के काउंटर पर खुद जमा करने पड़े!

Practical Takeaway
पॉलिसी वर्डिंग्स जांचें: अपनी या अपने माता-पिता की हेल्थ पॉलिसी में 'Co-payment' प्रतिशत की जांच करें।

शून्य को-पे (Zero Co-pay) चुनें: यदि आप युवा हैं और स्वस्थ हैं, तो हमेशा 0% Co-pay वाली पॉलिसी ही प्राथमिकता पर रखें।

ज़ोनल को-पेमेंट समझें: यदि छोटे शहर की पॉलिसी लेकर आप मेट्रो/Tier-1 शहर के बड़े अस्पताल में इलाज कराते हैं, तो लगने वाले Zonal Co-pay को पहले ही समझ लें।

क्या आपकी मौजूदा स्वास्थ्य नीति में को-पेमेंट क्लॉज जुड़ा है? अगर आप उलझन में हैं, तो अपनी पॉलिसी कॉपी हमें DM करें। The Vanik टीम बिना किसी शुल्क के आपकी पॉलिसी का पारदर्शी ऑडिट करने में मदद करेगी। 🤝

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